बदायूं। जलस्तर में इजाफा होने के साथ गंगा फैलाव लेने लगी है। तटवर्ती उसहैत और सहसवान के गांवों में कटान भी शुरू हो गया है। बाढ़ खंड के स्तर से दातागंज, सहसवान और सदर तहसील के 50 गांवों को संवेदनशील श्रेणी में रखा है तो प्रशासन ने भी 100 से ज्यादा गांवों को संवेदनशील श्रेणी में शामिल करते हुए यहां तैयारियां शुरू कर दी हैं।
बाढ़ के लिहाज से शासन ने बदायूं की सदर के साथ सहसवान और दातागंज तहसील को संवेदनशील श्रेणी में रखा है। इन स्थानों पर शासन स्तर से 30 जून तक बाढ़ नियंत्रण और बचाव की तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए थे। बाढ़ खंड की ओर से गंगा-महावा, चंदनपुर-हुसैनपुर, उसहैत और जोरी नगला तटबंधों की मरम्मत और उच्चीकरण का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। पिछले वर्ष गंगा और रामगंगा में विकराल बाढ़ के कारण इन बांधों को नुकसान पहुंचा था। इस बार तटबंधों की मरम्मत पर 30 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
मंगलवार को गंगा में हरिद्वार से 38576, बिजनौर से 23651 क्यूसेक, नरौरा बैराज से गंगा में 15 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। मंगलवार को कछला में मीटरगेज पर गंगा का जलस्तर 160.12 मीटर दर्ज किया गया था। दातागंज तहसील में सरेली, भुंडी, कटरा, पथरामई, अकबरपुर, उसहैत और रामगंगा पर आजमपुर, हजरतपुर, नगरियाखनू, तहसील मुख्यालय, बेलाडांडी, गलौथी, हथनीभूड़, समरेर, कमा, पडेली और गंडाह बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है।
इधर, बुधवार को हरिद्वार से 47803, बिजनौर से 24749 क्यूसेक, नरौरा बैराज से 14345 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। ऐसे में बुधवार को कछला का जलस्तर 160.70 रिकॉर्ड किया गया। कछला में मीटरगेज पर खतरे का निशान 165.20 मीटर पर है।
-
तटबंधों के उच्चीकरण का काम लगभग पूरा
बाढ़ खंड की ओर से गंगा-महावा, चंदनपुर-हुसैनपुर, उसहैत और जोरी नगला तटबंधों की मरम्मत का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। कटान वाले स्थानों पर इन दिनों बालू भरे बोरे लगाने का काम किया जा रहा है। बाढ़ खंड की टीमों ने इन बांधों की निगरानी भी शुरू कर दी है। दरअसल, गंगा में कभी भी एक लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी आ सकता है। एक लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी आने पर गंगा में उफान आ जाता है।
-
गंगा फैलाव लेने लगी हैं। बाढ़ खंड की ओर से सभी तैयारियों को पूरा करने के साथ तटबंधों की निगरानी को टीमें लगा दी गई हैं। तटबंधों की मरम्मत और उच्चीकरण का काम लगभग पूरा हो चुका है। फिलहाल गंगा के जलस्तर मीटर गेज पर 160-161 मीटर के बीच बना हुआ है। खतरे का निशान 165.20 मीटर पर है।
-नेशपाल सिंह, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड