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टेंशन में खाकी, पांच हिस्ट्रीशीटर बाकी

Wed, 16 Sep 2015 09:05 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बदायूं
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नंबर एक-
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शहर के इमली चौक निवासी कासिम पर वर्ष 1996 तक लूट, डकैती जैसे आठ संगीन मुकदमे दर्ज हुए। 1997 में पुलिस ने उसकी हिस्ट्रीशीट खोल दी। इसके बाद वर्ष 2000 से कासिम लापता है। तमाम कोशिश के बाद भी पुलिस को कासिम की कोई लोकेशन नहीं मिली। हालिया तफ्तीश में भी वह लापता हिस्ट्रीशीटर है।

नंबर दो-
पटियाली सराय मोहल्ले के राजीव उर्फ टन्नी की हिस्ट्रीशीट वर्ष 1981 में खुली। तब राजीव के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हुए थे। वर्ष 1990 में राजीव घर बेचकर शहर से चला गया। तब पुलिस के पास सूचना थी कि वह मुरादाबाद गया है। इस शातिर ही सही स्थिति के बारे में अब तक पुलिस के पास ठोस जानकारी नहीं है।
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नंबर तीन
शहर के मोहल्ला फरशोरी टोला निवासी रिजवान पर भी एक के बाद एक कई संगीन वारदात के मुकदमे दर्ज हुए। वर्ष 1975 से रिजवान लापता है। पुलिस आज तक उसके बारे में सही जानकारी नहीं जुटा सकी। सूत्र बताते हैं कि उसकी मौत हो चुकी है, लेकिन पुलिस के पास उसकी मौत का कोई प्रमाण नहीं है।

नंबर चार-
मोहल्ला सोथा निवासी सोयम उर्फ डालडा आज भी सदर कोतवाली का प्रचलित हिस्ट्रीशीटर है। एक वक्त में डालडा का अपराध जगत में काफी नाम रहा। डालडा भी 15 साल से लापता है। पुलिस को तमाम खोजबीन के बाद भी डालडा का कोई सुराग नहीं मिला। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि लापता डालडा किसी दूसरे जिलों में गिरोह चला रहा होगा।

नंबर पांच-
कोतवाली क्षेत्र के कबूलपुरा निवासी अख्तर मिर्जा का भी जरायम की दुनिया में खासा नाम रहा। कोतवाली में उसकी एचएस खोली गई और पुलिस ने उसकी निगरानी तेज कर दी। वर्ष 1984 के बाद से आज तक पुलिस को अख्तर की लोकेशन नहीं मिली। कुनबे के लोग मौत होने की बात कहते हैं, लेकिन इसके पुष्ट सबूत नहीं हैं।
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लापता हिस्ट्रीशीटर बदमाशों की तलाश जारी है। कुछ की मौत होने की बात भी पता लगी है, लेकिन पुलिस के पास इस संबंध में ठोस सबूत नहीं हैं। पड़ोसी जिलों के थानों में भी लापता एचएस के फोटो और जानकारियां भेजी गई हैं।
-आरएस धामा, सीओ सिटी
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