जिले का सेलटैक्स विभाग टैक्स वसूली के नाम पर अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मारता दिखाई देता है। सेलटैक्स के मामले में जिन फर्मों को निरस्त किया गया है। वे मंडी और साथी फर्मों की वैशाखी पर अपना व्यवसाय लगातार जारी रखे हुुए हैं। नए रास्ते से उन्हें फायदा मिल रहा है। टैक्स की चोरी भी हो रही है। फर्मों और मंडी के खेल में सेलटैक्स विभाग चारों खाने चित नजर आ रहा है। राजस्व बटोरने की समीक्षा में भले ही वाणिज्य कर विभाग (सेल टैक्स) कागजी खेल कर रहा हो, लेकिन धरातल पर टैक्स वसूली में उसे मात ही मिल रही है। टिंबर फर्में इस खेल में सबसे आगे हैं। इन्हें मंडी का सहयोग भी पूरा मिल रहा है। सहसवान की चार और ककराला और उझानी की एक-एक टिंबर फर्में हैं, जो निरस्त हो चुकी हैं। बावजूद इसके मंडी से इनका गेट पास जारी हो रहा है। जानकारों की मानें तो बुलंदशहर, नोएडा, मोहन नगर, अलीगढ़, आगरा, मेरठ आदि के वाणिज्य सचल दल जो बिल सत्यापन को निकाले जाते हैं और यहां सत्यापन को भेजे जाते हैं, उनका सत्यापन न कर, बाबू की मिलीभगत से बिल वापस कर दिए जा रहे हैं। कार्यालय में इनका लेखाजोखा नहीं रहता था। ऐसे हालात देखकर इस मामले में कंप्यूटरीकरण का सहारा लिया गया है। इसके बावजूद पिछले तमाम मामलों को अनदेखी की चादर ओढ़ा दी गई है।
निरस्त की सूचना देने के बाद नहीं देखते मुड़कर
निरस्त फर्मों की सूचना मंडी को देने के बाद सेलटैक्स विभाग अपनी जिम्मेदारी का फर्ज इतिश्री कर देता है। बाद में कोई पूछताछ नहीं होती और न ही मंडी से इनके बारे में कोई जानकारी ली जाती है। इससे साफ जाहिर होता है कि मंडी को व्यवसायिक कार्य में सहयोग का इशारा मिल जाता है। इस तरह वाणिज्य कर विभाग से करोड़ों रुपया टैक्स का चोरी होता रहता है।
एक करोड़ टैक्स चोरी, जांच में लटकी
सहसवान के एक टिंबर मर्चेंट के खिलाफ विभाग लंबे समय से जांच कर रहा है। यह जांच कहां और क्यों अटकी है? यह तो विभाग ही जानता है, लेकिन ये तय है कि विभाग अगर सजग होता तो टिंबर मर्चेंट को टैक्स अदा करना पड़ता। आगे भी टैक्स प्रक्रिया जारी रहती। गौर करने वाली बात है कि इस फर्म ने जांच के नाम पर एक अधिकारी को उल्टे उलझा रखा है।
जो फर्में निरस्त की जाती हैं, उनके बारे में मंडी को अवगत करा दिया जाता है। उसके बाद मंडी का दायित्व है कि वह उनपर निगरानी रखे। कोई अन्य फर्म अपने नाम पर उनका व्यवसाय करा रही हैं। इस पर ही मंडी का अंकुश काम आता है। मंडी खुद में स्वतंत्र संस्था है। इस पर उनका कोई हक नहीं होता। इसलिए अधिक हस्तक्षेप भी वे नहीं कर पाते। बाकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। टैक्स चोरी रोकने का प्रयास जारी है और रहेगा।
- देवेंद्र सिंह, असिस्टेंट कमिश्नर, वाणिज्य कर विभाग