बदायूं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की लापरवाही कहीं मरीजों की जान पर भारी न पड़ जाए। राजकीय मेडिकल कॉलेज में आटोमेटिक फायर फाइटिंग सिस्टम पूरी तरह से फेल है। वहीं, बिसौली का माहेश्वरी हॉस्पिटल बिना फायर एनओसी के संचालित है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने हॉस्पिटल में मरीज न भर्ती किए जाने के लिए सीएमओ को पत्र तक लिखा था। इसके बावजूद वहां मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। अब सवाल यह है कि अगर हादसा हुआ तो कौन जिम्मेदार होगा।
राजकीय मेडिकल कॉलेज कहने को जिले का सबसे बड़ा अस्पताल है। साल 2017 से यहां 150 मरीज भर्ती रहने का औसत है। फायर फाइटिंग सिस्टम वार्डों में लगा है, लेकिन अगर आग लग जाती है तो इसे चलाने का सिस्टम ध्वस्त है। मेडिकल कॉलेज को अभी तक दमकल की एनओसी नहीं मिली है। इसके बावजूद मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।
अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने जिले भर के अस्पतालों में पिछले दिनों चेकिंग शुरू की थी। इस दौरान पता चला कि बिसौली के माहेश्वरी हॉस्पिटल के पास एनओसी ही नहीं है। हॉस्पिटल बिना एनओसी के चल रहा है। इस संबंध में 30 मई को जिला मुख्य अग्निशमन अधिकारी रामराजा यादव ने सीएमओ को पत्र लिखा था। उन्होंने लिखा था कि माहेश्वरी हॉस्पिटल में आग से बचाने का कोई उपाय नहीं है। लिहाजा जब तक एनओसी नहीं मिल जाए, तब तक हॉस्पिटल में मरीज भर्ती न किए जाएं। उनके पत्र पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी खानापूरी कर दी गई।
- बिसौली के माहेश्वरी हॉस्पिटल के पास एनओसी नहीं है। 30 मई को हमने सीएमओ को पत्र भेजकर हॉस्पिटल का संचालन बंद कराने को कहा था। अगर संचालन बंद नहीं कराया गया है तो यह स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही है। - राम राजा यादव, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
- राजकीय मेडिकल कॉलेज को एनओसी तो नहीं मिली है, लेकिन प्रोविजनल एनओसी लेकर काम चलाया जा रहा है। जब भवन का निर्माण पूरा हो जाएगा तो पूरा फायर फाइटिंग सिस्टम काम करेगा। एनओसी भी मिल जाएगी। तब तक जरूरी उपाय किए गए हैं।- डॉ. एनके प्रजापति, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
- बिसौली के माहेश्वरी हॉस्पिटल के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। अग्निशमन विभाग से जो पत्र आया है, उसे दिखवाता हूं। उसके बाद हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।- डॉ. मोहन झा, एसीएमओ