जिला अस्पताल की ओपीडी के बहार मारपीट के दौरान मौजूद भीड़। स्रोत: सीसीटीवी फुटेज
बदायूं। जिला अस्पताल के नशा उन्मूलन केंद्र के डाटा मैनेजर और काउंसलर ने एक दूसरे पर मारपीट करने के आरोप लगाए है। इससे पहले बुधवार को डाटा मैनेजर ने काउंसलर व उनके भाई पर पीटने व बदसलूकी करने के आरोप लगाए थे। बृहस्पतिवार को काउंसलर ने डाटा मैनेजर समेत 20-25 लोगों पर मारपीट करने के आरोप लगाए है। सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने मामले की जांच की है।
जिला अस्पताल के डाटा मैनेजर ने सीएमएस डॉ. कप्तान सिंह को बताया कि बुधवार की सुबह करीब 10 बजे वह अपने कमरे में बैठे थे। इस दौरान उन्होंने काउंसलर से कहा कि वह ड्यूटी ठीक से नहीं निभाते है। मरीजों की काउंसलिंग ठीक से नहीं हो पा रही है। इतना सुनकर काउंसलर भड़क गए। आरोप है कि काउंसलर ने अपने भाई को बुला लिया। दोनों भाइयों ने उनके साथ मारपीट की। मारपीट देख स्टाफ नर्स कमरे से बाहर चली गई। इसके बाद दोनों भाइयों ने कमरा बंद करके उन्हें जमकर पीटा, पैर छुआएं। जमीन पर नाक रगड़वाकर माफी मांगवाई। लाइसेंसी बंदूक से गोली मारने की धमकी दी। अस्पताल में परिसर में नहीं रहने के लिए धमकाया। डाटा मैनेजर ने पुलिस को तहरीर भी दी थी।
बृहस्पतिवार को काउंसलर ने डाटा मैनेजर पर मारपीट का आरोप लगाया। आरोप है कि दोपहर के समय वह ओपीडी में थे। इसी बीच 20-25 लोगों ने उनपर हमला कर दिया। सोने की चेन, नकदी व मोबाइल छीन लिया। डाटा मैनेजर ने उनकी पत्नी के साथ छेड़खानी की थी। इसका विरोध जताते पर उनके साथ मारपीट की गई थी। उन्होंने सीएमएस से शिकायत की। आरोप है कि वह कोतवाली पुलिस को तहरीर देने जा रहे थे। तभी हमलावरों ने हमला कर दिया है। इस घटनाक्रम का सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ है। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर आरोप लगाकर पुलिस को तहरीर है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। सदर कोतवाल प्रवीण सिंह ने बताया कि इस मामले में दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर आरोप लगाए है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टर के इशारे पर हमला कराने का आरोप
काउंसलर का आरोप है कि जिला अस्पताल के एक डॉक्टर के इशारे पर उनपर डाटा मैनेजर व उनके साथियों ने जानलेवा हमला किया है। घटना के वक्त फिजीशियन वहां मौजूद थे। उनके कहने पर ही हमलावर उनके कमरे तक पहुंचे और जमकर मारा पीटा। आरोप है कि फिजीशियन नेताओं के साथ रहने के साथ ही जिला अस्पताल में राजनीति कर रहे हैं। वह नेताओं के संरक्षण के कारण जिला अस्पताल में कम बैठते हैं।