जिले में बुखार का प्रकोप बढ़ा तो जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। यहां प्रतिदिन 50 से 100 मरीज भर्ती होते हैं। ओपीडी में रोजाना औसतन 12 सौ मरीज पहुंचते हैं।
जिला अस्पतान में ओपीडी का पर्चा बनवाने को सुबह से मरीजों ही लाइन लग जाती है। डाक्टरों की संख्या कम होने से ओपीडी में मरीजों की जबरदस्त भीड़ रहती है। रोज लगभग 500 मरीजों की जांच की जा रही है। इनमें 50 से 100 मरीज भर्ती कर लिए जाते है। भर्ती होने वालों में ज्यदातर मरीज बुखार के होते हैं।
जिला अस्पताल में एक महीने में 20 मरीजों की हुई
पिछले एक महीने में जिला अस्पताल में 20 लोगों की बुखार से मौत हो चुकी है। जबकि जिले में बुखार से मरने वालों की संख्या 60 पहुंच गई है। इनमें सबसे ज्यादा मौत मलेरिया बुखार से हुई है।
प्रधान पैसा मिलने के बाद नहीं करा रहे डीडीटी का छिड़काव
-ग्रामीण क्षेत्रों में फैल रहे बुखार और मलेरिया को लेकर रोजाना टीम डीडीटी का छिड़काव करा रही है। वहीं अब ग्राम प्रधानों को भी शासन की और से प्रति महीने दस हजार रुपये एंटी लार्वा स्प्रे का छिड़काव कराने के लिए दिया जा रहा। ताकि गांव में फैलने वाली बीमारियों पर रोक लग सके। सोमवार को पनौठा, दातागंज, म्याऊ, समरेर आदि गांव में फॉगिंग कराई गई। जगत ब्लाक के गांवों में पांच दिन से लागातर छिड़काव हो रहा है। वहीं सीमएओ नेमी चंद्रा भी खुद बुखार पीड़ितो के हालात परखने के लिए गांव की ओर निरीक्षण कर रहे है।