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सालारपुर में बुखार से  चार महिलाओं की मौत

Sun, 11 Sep 2016 11:49 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
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सालारपुर में बुखार से  चार महिलाओं की मौत - फोटो : अमर उजाला
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दरावनगर की एक महिला को गई डेंगू की पुष्टि
 जिले में बुखार बेकाबू हो रहा है। सालारपुर ब्लाक के तीन गांवों में बुखार से चार महिलाओं की मौत हो गई है। इनमें एक को बरेली के एक मेडिकल कॉलेज में डेंगू की पुष्टि हुई है। इसके अलावा करीब एक दर्जन गांवों में सैकड़ों लोग बुखार से जूझ रहे हैं। कुंवरगांव स्थित नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वीरान पड़ा हुआ है। ऐसे में बीमार लोगों को निजी डॉक्टर और झोलाछाप की शरण में जाना पड़ रहा है।
सालारपुर ब्लाक के गांव दरावनगर के प्रेमबाबू की पत्नी ममता (24) को कई दिन से बुखार आ रहा था। हालत बिगडने पर परिवार वालों ने ममता को बरेली के एक मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। यहां डॉक्टर ने उसे डेंगू होने की पुष्टि की। इलाज के दौरान ममता ने दम तोड़ दिया। गांव के दर्जनों लोग बुखार की चपेट में हैं। इधर, दरावनगर गांव की ही 60 वर्षीय रामवती की ससुराल उझानी के गांव इटौआ में है। रामवती यहां अपने मायके आई हुई थीं। बुखार ने उन्हें चपेट में ले लिया। इलाज के दौरान रामवती ने दम तोड़ दिया।
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क्षेत्र के गांव अहरुइया में भी स्थिति काफी गंभीर है। यहां भी दो महिलाओं की बुखार से जान चली गई है। गांव के सुधीर की पत्नी विशुना (25) और जाकिर खान की पत्नी शबीना (30) की बुखार से मौत हो गई। दोनों को पिछले एक सप्ताह से बुखार आ रहा था। निजी डॉक्टर से इलाज कराया जा रहा था। हालत में सुधार न होने पर परिवार के लोग विशुना को इलाज के लिए बरेली ले गए थे। वहां इलाज के दौरान विशुना ने दम तोड़ दिया। शबीना की गांव में ही मौत हो गई। एक ही गांव में दो महिलाओं की बुखार से मौत की वजह से लोगों में दहशत है। अब तक स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची है।
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टिकलापुर में बुखार से बच्ची की मौत
मूसाझाग। समरेर ब्लाक के गांव टिकलापुर में पप्पू की एक वर्षीय बेटी रजनी की बुखार से मौत हो गई। बच्ची को कई दिन से बुखार आ रहा था। रविवार को उसकी हालत ज्यादा बिगड़ गई। परिवार वाले बच्ची को अस्पताल ला रहे थे। उससे पहले उसने दम तोड़ दिया। 
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वीरान पड़ा रहता है कुंवरगांव का स्वास्थ्य केंद्र
कुंवरगांव। कहने को तो स्वास्थ्य सेवाओं के नाम से गांव में नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन यह वीरान पड़ा रहता है। डॉक्टर और बाकी स्टाफ मनमानी करता है। दवाओं की किल्लत होने के साथ स्वास्थ्य केंद्र पर जांच की सुविधाएं भी नही हैं। ऐसे में ग्रामीणों को निजी डॉक्टर और झोलाछाप की शरण में जाना पड़ता है। कस्बे के लोगों ने कई बार स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए उच्च अधिकारियों से फरियाद की, लेकिन नतीजा शिफर ही रहा।
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बुखार से एसओ मूसाझाग की हालत बिगड़ी
मूसाझाग। एसओ मूसाझाग वाहिद खान की भी बुखार से हालत बिगड़ गई है। पहले तो वह मूसाझाग में ही एक डॉक्टर से दवा लेते रहे। फायदा न होने पर वाहिद खान को एक निजी डॉक्टर के यहां भर्ती कराया गया है। अब उनकी हालत में सुधार है। थाने के छह अन्य सिपाही भी बुखार की चपेट में हैं। सिपाही राहुल, दीपक, आशिक मार्शल, कमल सिंह, करन पाल, सिद्घार्थ का इलाज चल रहा है।
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संक्रामक रोग फैलने की मुख्य वजह गंदगी 
बदायूं। जिले में संक्रामक बुखार फैलने की मुख्य वजह गंदगी है। गांवों में भ्रमण कर रहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें लोगों की जांच कर दवा वितरण कर रही हैं। लोगों को साफ-सफाई के प्रति भी जागरूक कर रही हैं। इसके बाद भी लोगों में सफाई के प्रति जागरूकता का अभाव है। ऐसे में गांवों में संक्रामक रोग फैल रहे हैं।
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हेल्थ कैंप में 691 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण
बदायूं। स्वास्थ्य विभाग की संक्रामक रोग नियंत्रण सेल की ओर से ककराला, ढका, देवरारा, अगेसी गांवों में लगाए गए हेल्थ कैंपों में 691 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इसके साथ ही 79 लोगों की स्लाइड भी बनाई गई। संक्रामक रोग सेल प्रभारी डॉ. कौशल गुप्ता, डॉ. कमर इकबाल, डॉ. ओएन सिंह ने लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। सबसे ज्यादा 259 मरीज अगेसी गांव में देखे गए। यहां 24 लोगों की स्लाइड बनाई गई।
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कुछ इलाकों में बुखार का ज्यादा प्रकोप है। इसकी मुख्य वजह गंदगी है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार कैंप कर रही हैं। जहां से भी संक्रामक रोग फैले होने की खबर मिलती है वहां हेल्थ कैंप लगाया जा रहा है। स्थिति पूरी तरह से काबू में है।
-सुनील कुमार, सीएमओ
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