जरीफनगर के युवक की डेंगू से नोएडा में मौत
फरीदाबाद, लोचनपुर में बुखार से 200 लोग पीड़ित
दातागंज के पापड़ गांव में फैल चिकनगुनिया का प्रकोप
जिले में बुखार का प्रकोप थमने का नाम नही ले रहा है। अलापुर के वार्ड नंबर तीन निवासी गोकरन कश्यप (65) को कई दिन से बुखार आ रहा था। सोमवार को गोकरन की मौत हो गई। वहीं, वार्ड नंबर आठ के केदार पानी (70) भी कई दिन से बुखार से पीड़ित थे। इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई। वहीं जरीफनगर थाना क्षेत्र के गांव आरिफपुर भगता नगला निवासी विजय सिंह पुत्र चंद्रपाल को कई दिन से बुखार आ रहा था। स्थानीय डॉक्टर से इलाज में फायदा न होने पर परिवार के लोगों ने विजय को ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां जांच में डॉक्टर ने उसे डेंगू होने की पुष्टि की थी। वहां विजय का चार दिन से इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान विजय की मौत हो गई।
कुंवरगांव। सालारपुर ब्लाक के गांव फरीदाबाद और लोचनपुर में संक्रामक बुखार का प्रकोप है। दोनों गांवों में करीब 200 लोग बुखार की पकड़ में हैं। इसी ब्लाक के गांव यूसुफ नगर में हाल ही में बुखार से दो लोगों की मौत हो चुकी है। गांव में अब तक स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची है। गांव के लोगों में बुखार से हो रही मौतों को लेकर दहशत है।
दातागंज। तहसील क्षेत्र के गांव पापड़ में चिकनगुनिया का प्रकोप शुरू हो गया है। गांव में करीब एक दर्जन लोग इसकी चपेट में हैं। गांव के एक ही परिवार के आठ लोगों का बरेली में इलाज चल रहा है। पापड़ निवासी संजय गुप्ता के पुत्र नवदीप गुप्ता की पिछले दिनों बुखार से मौत हो गई थी। अब उनकी 12 वर्षीय बेटी निकिता को चिकनगुनिया ने चपेट में ले लिया है। संजय गुप्ता, उनकी पत्नी कमलेश, पिता सत्यपाल, भाई गुड्डू, गुड्डू की पत्नी और बेटी भी बुखार की चपेट में हैं। इनका बरेली में इलाज चल रहा है।
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30 बेड का अस्पतालजांच सिर्फ मलेरिया की
दातागंज। कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अव्यवस्थाएं हावी हैं। 30 बेड के सीएचसी का यहां के लोगों को फायदा नहीं हो रहा। संक्रामक बुखार के सीजन में रोज करीब 600 से 700 मरीज सीएचसी पहुंच रहे हैं। सुविधाओं के नाम पर यहां सिर्फ मलेरिया की जांच हो रही है। चिकनगुनिया, डेंगू, टाइफाइड जैसे जानलेवा बुखार के जांच की यहां कोई व्यवस्था नहीं है।
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स्वास्थ्य विभाग के हाथ-पांव फूले, हालात बेकाबू
जिले में संक्रामक बीमारियों पर काबू पाने में स्वास्थ्य विभाग के हाथ-पांव फूल गए हैं। जिले में संक्रामक रोग नियंत्रण सेल समेत 18 टीमें कैंप कर रही हैं। जगह-जगह स्वास्थ्य शिविर लगाकर दवाओं का वितरण किया जा रहा है। इसके बावजूद रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले के पांच सीएचसी, 12 पीएचसी, तीन अर्बन पीएचसी और 43 न्यू पीएचसी समेत जिला अस्पताल में रोज करीब 10 हजार मरीज पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा संख्या बुखार से पीड़ितों की है। बता दें जिले में अब तक 55 लोगों की बुखार से मौत हो चुकी है।
जिले में अगस्त के पहले सप्ताह में बुखार का प्रकोप शुरू हुआ था। जगत, कादरचौक, म्याऊं, उसावां, सालारपुर और दहगवां ब्लाकों में अब तक बुखार से 55 लोगों की जान जा चुकी है। ककराला में बुखार का सबसे ज्यादा प्रकोप है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जिले की प्रत्येक सीएचसी पर रोज 600 से 700 मरीज पहुंच रहे हैं। पीएचसी पर भी मरीजों की संख्या प्रतिदिन 400 से 500 के बीच है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोज 1200 से 1500 मरीज पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल के बेड फुल हो गए हैं। एक बेड पर तीन-तीन मरीजों का इलाज चल रहा है। कई सीएचसी और पीएचसी पर दवाओं का टोटा भी हो गया है।