तीन-चार दिन पहले तक हुई बरसात ने खेती की दिशा और दशा ही बदल डाली। बादल छाए रहने से आलू को झुलसा तो मटर और सरसों को माहु रोग जकड़ लेगा। बरसात से गेहूं को तो मानो संजीवनी ही मिल गई।
बरसात के बाद बादल छाए रहने के साथ नफा और नुकसान का आंकलन करने में जुटे काश्तकार हर वक्त आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं। आलू, सरसों और मटर की फसल को आसमान साफ रहने की जरूरत है। बादल छाए रहे तो आलू पर झुलसा रोग का साया पड़ जाएगा। माहु ऐसे ही मौसम में सरसों और मटर को चपेट में ले लेती है। मटर पर तो पाउड्रमिलड्यू का खतरा भी बना हुआ है। शिमला मिर्च, टमाटर, पत्ता और फूल गोभी की फसल भी बरसात से फायदे वाली श्रेणी में आ गई है। गन्ने की पेढ़ी पर हरियाली नजर आने लगी है। पिछले दिनों की बरसात से सबसे ज्यादा फायदा अगर किसी फसल को है तो वह गेहूं ही है।
कोहरे में तेजी से बढ़ता है गेहूं का पौधा
गेहूं की फसल में ये दिन कल्ले फूटने के भी हैं। ऐसे में अगर कोहरा पड़ता रहता है तो गेहूं का पौधा तेजी से बढ़ता है। कृषि वैज्ञानिक भी ऐसा ही मानते हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो दिसंबर के अंत और जनवरी के शुरूआती दिनों में गेहूं के बेहतर उत्पादन के लिए कोहरा पड़ना बहुत जरूरी है।
अपेक्षाकृत बढ़ा होगा अमरूद
ठंड के दिनों में आसमान में बादल छाए रहने पर बागवानी में अमरूद को ज्यादा फायदा होता है। नमी के दिनों में ही अमरूद की बढ़वार होती है। फल पर तुषार का असर बीच-बीच में बरसात होने से कम हो जाता है। ऐसे में फल भी सामान्य दिनों के मुकाबले अपेक्षाकृत बड़ा हो जाता है।
पिछले दिनों हुई बरसात से नुकसान की आशंका काफी कम है लेकिन खराब मौसम आलू, सरसों, मटर को प्रभावित कर सकता है। तेज हवा चली तो तुषार कम पड़ेगा। फिलहाल किसानों के सामने ज्यादा चिंता की बात नहीं है। - डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक।