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‘नेमाटोड’ ने मचाई फलपट्टी में तबाही

Mon, 08 Dec 2014 12:04 AM IST
विनोद भारद्वाज/बदायूं।
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ककराला फलपट्टी में अमरूदों के बागानों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। करीब 60 फीसदी फसल पिछले दो वर्षों में नष्ट हो चुकी है। इसकी रफ्तार बढ़ जाने से पूरी फलपट्टी पर  संकट के बादल मंडरा रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यहां नेमाटोड नामक बीमारी से फलपट्टी बुरी तरह ग्रसित है। इस संबंध में डीएम के साथ भी वैज्ञानिकों को बात हो चुकी है। फिलहाल, इसका कोई हल नहीं निकल सका है।
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ककराला से लगे 50 हेक्टेयर से अधिक इलाके में अमरूदों के बागान होने केे कारण ही इस क्षेत्र को फल पट्टी घोषित किया गया था। दरअसल, फसल चक्र न होने के कारण भी यहां इस बीमारी ने अपनी जड़ें जमा ली हैं। इस बीमारी की अधिकता के कारण बीमारी लाइलाज होने जा रही है। इसके साथ ही उकटा (विल्ट) रोग से भी यहां के बागान अपना अस्तित्व खो रहे हैं।
उत्पादन की कमी से 40 रुपये बिका अमरूद
बागानों में कमी होने के कारण उत्पादन भी घटा है। फुटकर में अमरूदों का भाव 40 रुपये प्रति किलो है। यहां का अमरूद दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान आदि के प्रांतों के अलावा नेपाल भी जाता है। इस बार अमरूद की कमी ने इस व्यवसाय में भी कमी की है। जहां प्रतिदिन 150 ट्रक तक अमरूद बाहर जाता था। आज 50-60 ट्रक ही बाहर जा पा रहा है।  
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परेशान है ककराला के अमरूद उत्पादक
फलपट्टी घोषित होने के बाद शासन की ओर से मिलने वाली सुविधाएं तो नहीं मिल रहीं, वहीं अमरूद के पेड़ नष्ट हो रहे हैं और उत्पादन कम हो रहा है। वहीं आढ़तिया भी भाव नहीं देते। उत्पादक को खुद कीमत तय करने का अधिकारी नहीं हैं। आढ़तिया ही अमरूद का भाव तय करते हैं।
कृषि वैज्ञानिक संजय कुमार की सलाह
नेमाटोड और उकटा की रोकथाम हो सकती है लेकिन इसके लिए विशेष प्रयास करने होंगे। इसके लिए अधिक धन की भी आवश्यकता होगी। फौरी तौर पर फ्याराडान कीटनाशक 33 किग्रा प्रति हेक्टेयर डालकर हल्की सिंचाई कर इस रोग को रोका जा सकता है। वहीं ट्राइकोडर्मा 25 किग्रा गोबर में मिलाकर 25 दिन रखने के बाद बागान में डाली जाए तो उकटा पर नियंत्रण किया जा सकता है। नीम की खली भी इसके लिए उपयोगी है।
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