प्रदेश सरकार ने भले ही किसानों का ऋण माफ कर दिया और तमाम लोगों को ऋण माफी के प्रमाण पत्र भी दे दिए हो लेकिन क्षेत्र के तमाम किसान ऐसे हैं, जिनका ऋण बैंक कर्मचारियों की मनमानी के कारण माफ नहीं हो पाया है। किसानों को नए नियम-कानून समझाकर उन्हें बैंक का कर्जदार बनाए रखना कर्मचारियों की मंशा नजर आ रही है। इस बाबत किसानों ने अपनी बात को रखते हुए मुख्यमंत्री को पत्र भी भेजा है कि किस तरह से बैंक कर्मचारी ऋण माफी के दायरे में आने के बाद उन्हें बैंक का कर्जदार बनाए हुए हैं।
ग्राम पंचायत जरौली कोठी निवासी किसान रामसेवक का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2014 में बड़ौदा उ.प्र. ग्रामीण बैंक शाखा कीलापुर से 50 हजार रुपये कृषि ऋण लिया था। कर्ज माफी का आदेश आया तो उसने जानकारी करके बैंक में आधार कार्ड जमा कर दिया है। फिर भी अभी तक ऋण माफ नहीं हुआ है। बेहटा जंगल ग्राम पंचायत के मजरा भौंरा नगला निवासी वृद्ध किसान भगवान सिंह ने वर्ष 2006 में कृषि भूमि विकास बैंक शाखा कलान से 40 हजार लोन लिया था। लोन माफी के लिए आधार कार्ड बैंक में देने गए ,तो मैनेजर ने कहा कि अभी तक उनके पास ऋण माफी का कोई आदेश नहीं आया है।
वहीं, भौंराह नगला गांव निवासी उदयवीर यादव ने बताया कि उन्होंने भैंस पालन के लिए वर्ष 2006 में भूमि विकास बैंक से 16 हजार रुपये का ऋण लिया था। जिसे चुकता नहीं कर पा रहा था, इसी बीच प्रदेश सरकार से ऋण माफी की योजना आई तो लगा कि ऋण माफ हो जाएगा लेकिन माफ नहीं हुआ। उधर, उदयपुर-भूड़ा ग्राम पंचायत के मजरा नौसारा निवासी प्रेमपाल सिंह कुशवाहा ने स्टेट बैंक की जलालाबाद शाखा से वर्ष 2015 में एक लाख पांच हजार रुपये कृषि ऋण लिया था। ऋण माफी योजना पर वे एक सौ रुपये का स्टांप और आधार कार्ड बैंक में देने गए,तो मैनेजर ने ऋण माफ होने से मना कर दिया।