उझानी। झमाझम बारिश में शिमला मिर्च और फूल गोभी की फसल में करीब 70 फीसदी तक नुकसान होने के बाद बचे पौधों को फफूंदी ने खराब कर दिया। कुछ किसानों ने फफूंदीनाशक का इस्तेमाल किया, लेकिन कोई लाभ नजर नहीं आया। इससे किसानों ने फसलों को उजाड़ना शुरू कर दिया। कुछ किसानों ने ट्रैक्टरों से शिमला मिर्च और फूल गोभी की फसल को खेतों में ही जोत दिया।
मुजरिया क्षेत्र के गांव ज्योरा पारवाला निवासी विजय सिंह बुधवार सुबह ट्रैक्टर लेकर खेत पर पहुंचे। उन्होंने करीब पांच बीघा खेत में लगी शिमला मिर्च की फसल जोत दी। बताया कि पिछले दिनों बारिश की वजह से फसल में पानी भर गया था। पानी के निकास की व्यवस्था नहीं हो पाई तो पौधों पर फफूंदी का प्रकोप बढ़ गया। कीटनाशक के छिड़काव से भी कोई फायदा नहीं हुआ।
इसी तरह अहीरटोला मोहल्ला निवासी सुखपाल यादव, संजरपुर के अतुल, नरोत्तम और सोनू ने भी खेत में ही फसल की जोताई कर दी। किसान अतुल के खेतों में शिमला मिर्च के अलावा फूल गोभी भी थी। बारिश से गोभी में भी काफी नुकसान हुआ था।
दरअसल, शिमला मिर्च और फूल गोभी की फसल में शुरूआत में ही 18 से 20 हजार रुपये तक प्रति बीघा की लागत आई थी। पौधे तैयार करने से लेकर पौध रोपण के एक महीना बाद तक दोनों फसलें तैयार करने में लागत का करीब 80 फीसदी तक खर्चा हो जाता है। आर्थिक नुकसान से परेशान किसानों ने अगली फसल के लिए खेतों की तैयारी भी शुरू कर दी है, ताकि वह फसल की समय रहते बोआई कर पहले से हो चुके आर्थिक नुकसान की कुछ हद तक भरपाई भी कर सकें। बता दें कि इलाके के गांव रिसौली, किनापुर, भिलौलिया, रौली, जमरौली, संजरपुर आदि शिमला मिर्च समेत अन्य सब्जी फसलों के लिए जाने जाते हैं।
कृषि वैज्ञानिकों के सर्वे में करीब 400 हेक्टेयर में नुकसान का दावा
बारिश के बाद कृषि वैज्ञानिकों ने जिला उद्यान अधिकारी आरएन वर्मा की मौजूदगी में सब्जी फसलों में हुए नुकसान का सर्वे किया था। सर्वे में शिमला मिर्च का रकबा छह सौ हेक्टेयर से अधिक बताया गया था। इसमें करीब 400 हेक्टेयर रकबा में फसल के नुकसान होने का दावा किया गया था। इसी तरह फूल गोभी की फसल के 450 हेक्टेयर रकबा में करीब दो सौ हेक्टेयर में फसल के नुकसान का आकलन किया गया था। वैज्ञानिकों ने फफूंदीनाशक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया था, लेकिन ज्यादा नुकसान वाली फसल में छिड़काव का कोई फायदा नहीं मिला।
फसल उजाड़ने के अलावा नहीं बचा था कोई विकल्प
करीब 15 बीघा खेत में शिमला मिर्च लगाने में काफी रकम खर्च हुई थी। इसके बाद भी पौधे बढ़वार नहीं पकड़ पाए। वह झुलसे नजर आने लगे तो ट्रैक्टर से फसल को उजाड़ दिया। कोई और विकल्प भी नहीं बचा था।- सुखपाल यादव, अहीरटोला
पानी का निकास होता तो बच जाती फसल
बारिश तीन दिन तक लगातार होने से खेतों में पानी भर गया था। काफी कोशिश के बाद भी खेत से पानी के निकासी की व्यवस्था नहीं कर पाए थे। इसी वजह से फफूंदी लग गई और पौधे झुलस गए। उन्हें बचाया भी नहीं जा सका। - विजय सिंह, ज्योरा पारवाला
खाली खेतों में बोएं सरसों, अच्छी होगी पैदावार
शिमला मिर्च और फूल गोभी की फसल फफूंदी की वजह से झुलस जाने के बाद जिन किसानों ने उसे उजाड़ दिया है, उस खेत में अगली फसल के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दें। सरसों की बोआई समय रहते कर ली गई तो उसकी पैदावार भी अच्छी होगी। किसानों के सामने आर्थिक नुकसान की भरपाई करने का अच्छा मौका है। - डॉ. मनीष कुमार सिंह, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र, उझानी
बारिश के बाद खराब हुई शिमला मिर्च को खेत में जोतते किसान। संवाद
बारिश के बाद खराब हुई शिमला मिर्च को खेत में जोतते किसान। संवाद
बारिश के बाद खराब हुई शिमला मिर्च को खेत में जोतते किसान। संवाद