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विकास की राह से कोसों दूर आनंदीपुर

Thu, 02 Jul 2015 08:11 PM IST
Sahaswan
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नगर सीमा से सटा गांव आनंदीपुर विकास की राह से भटका हुआ है। गांव में जो मूलभूत आवश्यकताएं होती हैं, सफाई, पथ प्रकाश और पेयजल... वो तक चौपट हैं। इंदिरा आवास अधूरे पड़े हैं। ग्रामीण सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए ब्लाक मुख्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
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आनंदीपुर ग्राम पंचायत के दो मजरे भी हैं, सिकंदरपुर और नसूरपुर-फिरोजपुर। सामान्य श्रेणी के इस गांव की कुल आबादी लगभग सात हजार है, जिसमें दोनों मजरों को मिलाकर 1700 वोटर भी हैं। इस बड़ी ग्राम पंचायत में पांच साल में जितना अपेक्षित विकास होना चाहिए, वो हुआ नहीं। प्रधान प्रेमचंद्र ने पांच साल के अपने कार्यकाल में पांच इंदिरा आवास का निर्माण कराया, सभी अधूरे पड़े हैं। पात्रों का कहना है कि उन्हें अभी तक एक ही किस्त मिल पाई है। सफाई व्यवस्था बदहाल है। तैनात सफाई कर्मचारी महीने में एक-दो बार ही गांव आता है। पेयजल व्यवस्था चौपट है। जूनियर हाईस्कूल, मौर्य बस्ती और मदरसा के पास लगवाए गए चार सरकारी हैंडपंप खराब पड़े हैं, जिनको ठीक कराने के लिए अब तक कोई पहल नहीं की गई। शिक्षा के लिहाज से दो स्कूल हैं। एक प्राइमरी और एक माध्यमिक। यहां मिड-डे मील के लिए बच्चों का जमावड़ा लगता है। जो पढ़ने में ठीक हैं, वो गांव के स्कूलों में नहीं पढना नहीं चाहता। उनके अभिभावक उन्हें जिला मुख्यालय पर पढ़ने भेजते हैं।  
बिजली की लाइन है, लेकिन पथ-प्रकाश नहीं। मनरेगा के तहत कुछ संपर्क मार्ग और खड़ंजों का निर्माण कराया गया है, जिनकी हालत खस्ता है। ग्रामीण प्रधान पर दोषारोपण करते हैं। प्रधान कहते हैं जितना मिला दाम उतना करा दिया काम।
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