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कैफे संचालक के रेलवे में ई-टिकट के धंधेबाजों से जुड़े हैं तार

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उझानी (बदायूं)। कई लोगों के नाम की फर्जी आईडी से रेलवे के ई-टिकट बनाकर बेचने के धंधे में सोमवार को पकड़े गए राजेश कुमार उर्फ खन्ना को आरपीएफ ने मंगलवार को बरेली के रेलवे कोर्ट में पेश किया। इसके बाद उसे जेल भी भेज दिया गया है लेकिन आरपीएफ धंधे से जुड़े कुछ और लोगों के बारे में तह तक जाने की कोशिश में जुट गई है। उसके बरेली और कासगंज समेत कुछ बड़े स्टेशनों पर टिकट बेचने का धंधा करने वालों से तार जुड़े होने के संकेत के बीच आरपीएफ को उसके कैफे से जब्त कंप्यूटर की हार्ड डिस्क की भी लैब में जांच करानी होगी। जांच के दौरान हार्ड डिस्क से फर्जी आईडी और धंधेबाजों के बारे में अहम जानकारियां भी हासिल हो सकती हैं।
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कोतवाली क्षेत्र के गांव तेहरा निवासी कैफे संचालक राजेश कुमार के पास से आरपीएफ ने सोमवार को जो सामान जब्त किया, उसमें कंप्यूटर, सीपीयू मॉडम और प्रिंटर आदि भी शामिल था। सीपीयू की हार्ड डिस्क को लेकर आरपीएफ अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है लेकिन बरामदगी के दौरान ही आरपीएफ के संज्ञान में एक बात तो आई गई थी कि गोरखधंधा कोई स्थानीय स्तर का नहीं है। शायद ही ऐसा कोई दिन हो जब राजेश डेढ़-दो दर्जन आरक्षित टिकट बनाकर उन्हें सेल नहीं करता हो। सूत्रों की मानें तो उसके कैफे पर जिले भर से लोग पहुंचते थे। बरेली और कासगंज के धंधेबाज भी सेलफोन पर उसके संपर्क रहते थे। फर्जी आईडी से आरक्षित टिकट मुहैया कराने के एवज में वह अतिरिक्त वसूली भी कर लिया करता था।
हार्ड डिस्क के जरिए धंधेबाजों तक पहुंचने की कोशिश भी परवान तभी चढ़ेगी जब आरपीएफ उसकी जांच कराने के लैब में भेजे। इसके लिए आरपीएफ को रेलवे कोर्ट में अर्जी दाखिल करनी होगी। वैसे, उत्तराखंड में लालकुआं स्टेशन की आरपीएफ की नजर राजेश के कैफे पर पिछले महीना पड़ी थी। तब आरपीएफ को खाली हाथ लौटना पड़ा था। बताते हैं कि लालकुआं में किसी युवक ने धंधे की पोल खोल दी थी। इधर, आरपीएफ बदायूं ने राजेश के लिए मंगलवार को बरेली स्थित रेलवे कोर्ट में पेश किया। कोर्ट से उसे जेल भेज दिया गया है। बता दें कि पिछले महीना आरपीएफ ने ही रेलवे स्टेशन से बदायूं के जिन दो युवकों को दबोचा था, वह भी कुछ इसी तरह से धंधा किया करते थे।
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भनक लगते एक और कैफे बंद
उझानी। लोकवाणी केंद्र के नाम से कैफे पर रेलवे के ई-टिकट बनाने का खेल किसी एक स्थान पर नहीं बल्कि कुछ अन्य स्थानों पर भी चलता आया है। भले ही वह अपनी आईडी से टिकट बुक करके मुहैया कराते हों लेकिन नगर में सोमवार दोपहर बाद से एक कैफे पर उसके संचालक ने ताला लटका दिया है। उसने ताला उसी दिन डाला दिया जिस दिन राजेश के कैफे पर आरपीएफ की टीम ने छापा मारा था।
कैफे संचालक राजेश को बरेली में रेलवे के कोर्ट में पेश किया गया है। फिलहाल ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि धंधे में कई और लोग जुड़े हैं फिर भी हर पहलू पर गौर किया जा रहा है। जरूरत पड़ी तो हार्ड डिस्क की भी जांच कराएंगे।
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- सुभाष यादव, इंसपेक्टर, आरपीएफ।
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