साइबर सेल में पहुंचीं शिकायतें तो हुआ खुलासा
करीब 11 महीने से शहर के नई सराय मोहल्ले के एक मकान में ठगी का धंधा चल रहा था, लेकिन इसके बारे में पुलिस को पता नहीं लग सका। बीते दिनों जब साइबर सेल में ऐसी दस शिकायतें पहुंचीं तो इस मामले में जांच तेज हुई। पुलिस को करीब तीन माह से इस गिरोह की भनक थी, लेकिन पुख्ता जानकारी न होने के चलते इन पर कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। इस गिरोह द्वारा दिए गए लालच ने ही जिले की चार युवतियों व एक युवक को अपराधी बना दिया।
पुलिस के मुताबिक इस गिरोह के ठगों का नेटवर्क बिहार, यूपी, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश समेत कई प्रदेशों में फैला है। गिरोह के मुख्य सरगना उनके साथ कॉल सेंटर पर काम करने वाली युवतियों व युवक से फोन पर ही बात कर सभी जानकारी देते थे। दूसरे प्रदेशों से मोबाइल नंबर भी फेक आईडी से यह उपलब्ध करवाने का काम करते थे।
लोगों को दूसरे नाम से कॉल करके बनाते थे शिकार
गिरोह में काम करने वाले सभी युवक व युवतियां फोन कर लोगों को अपने बदले हुए नाम बताते थे। पुलिस द्वारा पकड़ा गया आरोपी विवेक खुद को राजीव के नाम से कॉल करता था। उसकी सिम भी राजीव के नाम से थी और वह कभी मुंबई तो कभी बिहार का रहने वाला बताता था। ऐसे ही आकांक्षा पटेल को रिया शर्मा के नाम की सिम दी गई थी। अंशू पटेल को भी रिया शर्मा, ईशा साहू को नाव्या शर्मा व कृतिका शर्मा के नाम की दो सिम दी गईं थीं।
मीनाक्षी को निधि शर्मा नाम की सिम उपलब्ध कराई गई थी। यह सभी लोग अपना असली नाम छुपाकर फर्जी नामों से ही कॉल करके लोगों को अपने जाल में फंसाने का काम करते आ रहे थे। ठग गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा है। जिले में भी अभी कई आरोपी और पकड़े जा सकते हैं। पुलिस की जांच में इस तरह की बातें सामने आई है। हालांकि गिरोह के ज्यादातर सरगना दूसरे प्रदेशों के ही बताए जा रहे हैं।
यह माल हुआ बरामद
लैपटॉप, प्रिंटर, माउस, लैपटॉप चार्जर, सात स्मार्ट फोन, चार मोबाइल कीपैड, सात मोबाइल चार्जर, 23 सिम कार्ड, एक एचडीएफ मुंबई की स्टांप मौहर, एक हाजिरी रजिस्टर, चार कॉपी, एक किरायेनामा की फोटोकॉपी बरामद की गई।
15 लोगों को वीजा देकर विदेश भेजने की थी तैयारी
एसपी सिटी विजयेंद्र द्विवेदी ने बताया कि जिले से 15 लोगों को विदेश का वीजा दिलाकर इस ठगी की दुनिया में धकेला गया था। गनीमत रही कि वह सभी लोगों को पुलिस ने विदेश जाने से पहले ही रोक लिया। इन लोगों को विदेश में एक लाख रुपये महीने तक नौकरी देने का लालच दिया गया था। एसपी सिटी ने बताया कि लोगों को इस तरह के लालच में नहीं फंसना चाहिए। इसके लिए भी अभियान चलवाकर लोगों को जागरूक करने का काम करेंगे।
शहर से दस किलोमीटर की दूरी के रहने वाले सभी आरोपी
गिरोह के सभी चार युवती व एक युवक शहर से दस किलोमीटर की दूरी के रहने वाले वाले निकले हैं। मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव गोविंद नगला निवासी विवेक है। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के गांव बरातेगदार की रहने वाली आकांक्षा पटेल है। लखनपुर गांव की रहने वाली अंशू पटेल है। मूसाझाग थाना क्षेत्र के कस्बा गुलड़िया निवासी ईशा साहू है, जबकि मीनाक्षी उझानी कोतवाली क्षेत्र के बरायमयखेड़ा की रहने वाली है।
नौकरी के लालच में ठगी के धंधे में फंसे
नौकरी और रुपये कमाने का ऐसा लालच कि युवतियां भी लोगों से ठगी करने लगीं। युवतियों ने पुलिस की पूछताछ में खुलासा किया है कि उनको 15 हजार रुपये महीने के वेतन पर रखा गया था। उनको पता नहीं था कि वह एक दिन जेल भी जा सकती हैं। बताया कि सभी युवतियां पढ़ी लिखी हैं। कोई बीएससी तो कोई बीए पास है।
उन्होंने बताया कि करीब तीन माह पहले ही उन्हें नौकरी पर रखा गया था। उन्हें नहीं पता कि यहां क्या चल रहा था। उनसे कॉल कराने को कहा जाता था। आरोपित हेम सिंह उर्फ टिंकू मौर्य और सलीम उर्फ अबलू ही उन्हें मोबाइल नंबर उपलब्ध कराते थे, जिस पर वह कार्यालय आकर कॉल करती थीं। अब तक उन्हें एक माह का वेतन भी नहीं दिया गया था। पुलिस हेम सिंह उर्फ टिंकू व सलीम की तलाश में पुलिस जुट गई है।
एसपी सिटी विजयेंद्र द्विवेदी ने बताया कि फरवरी 2025 से इस गिरोह की यहां सक्रियता चल रही थी। अब तक करीब दस हजार लोगों को यह गिरोह अब तक ठग चुका है। पुलिस जल्द ही अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही है। इस गिरोह पर दूसरे प्रदेशों में भी साइबर ठगी के मामले दर्ज है।