गुरुवार को लोगों द्वारा लगाए जा रहे कयास पर उस समय विराम लग गया, जब सपा नेता फखरे अहमद शोबी की पत्नी फायजा नकबी और इंदू सक्सेना ने नाम वापस ले लिया। सपा से जुड़े दोनों नेताओं के नाम वापसी के बाद भाजपा खेमे में हलचल बढ़ गई। अब फात्मा रजा से कड़ा मुकाबला माना जा रहा है।
सिर्फ नाम वापसी, समर्थन किसी को नहीं
सपा नेता फखरे अहमद शोबी ने बताया कि मेरे वालिद कमर अहमद नकवी 1967 से 1969 तक पालिकाध्यक्ष रहे हैं। इस बार मैंने भी अपनी पत्नी फायजा का नामांकन कराया था। सपा ने मुझसे लड़ाने का वायदा किया था। इसके बाद पार्टी ने कहा कि जिले में सिंबल नहीं दिया जाएगा लेकिन दो जगहों पर सिंबल दे दिया गया। बात साफ होनी चाहिए। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में भी भ्रम रहा, जो नहीं रहना चाहिए। मैंने सिर्फ नामांकन वापस लिया है, किसी को समर्थन नहीं दिया है। आगे क्या करना है इसका निर्णय बाद में लेंगे।
छह निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में
नाम वापसी के बाद शहर सीट पर छह निर्दलीय प्रत्याशी बचे हैं। भले ही फात्मा रजा निर्दलीय प्रत्याशी हों, लेकिन अघोषत तौर पर उन्हें सपा समर्थित माना जा रहा है। पिछले चुनाव की बात करें तो निर्दलीय कोई खास वोट नहीं जुटा पाए थे। इस चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़ीं महनाज अख्तर ने 745 वोट तथा मंजू सिंह ने केवल 111 वोट ही पाए थे। कांग्रेस और बसपा भी कमाल नहीं कर सकी थीं। बसपा प्रत्याशी प्रीति साहू 1377 वोट पाकर तीसरे स्थान पर तथा कांग्रेस प्रत्याशी राजरानी 590 वोट पाकर चौथे स्थान पर रहीं थीं।