बाढ़ खंड विभाग अभी बांधों की सुरक्षा समेत तमाम काम पूरे करने के लिए संभल भी नहीं पाया था कि हरिद्वार से गंगा में पानी छोड़ने की बड़ी सूचना आ गई है, इसे लेकर बाढ़ खंड विभाग के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। खास बात यह है कि गंगा में इस समय 4100 क्यूसेक पानी है और हरिद्वार डेम ने 1.93 लाख क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया है। पानी की एक साथ बढ़ोतरी से गंगा अपने फाटों में एक साथ फैलेगी। बांधों के अंदर बसे दर्जनभर गांवों को इससे खतरा पैदा हो सकता है।
दो दिनी झमाझम बारिश ने ही नदी किनारे रहने वालों को आशंकाओं में घेर लिया है। गंगा में पानी बढ़ने की आशंका सच साबित हो रही है। इस वर्ष सामान्य से अधिक वर्षा होने के कारण बाढ़ का खतरा भी बढ़ा है। गंगा और रामगंगा दो बड़ी नदियां बदायूं में हैं। इनमें बाढ़ में काफी जनधन की हानि हो चुकी है। वर्ष 2010 के बाद अभी कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है लेकिन हर साल कहीं न कहीं बाढ़ अपना कहर बरपाती है।
बाढ़ का सामना करने की तैयारी नहीं
मानसून ने दस्तक दे दी है। शुक्रवार को ही सूचना मिली है कि हरिद्वार से शुक्रवार को 12.00 बजे 1.93 लाख क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया है। इंजीनियरों को मानना है कि हरिद्वार से छोड़ा गया पानी तीसरे दिन कछला गंगा घाट तक पहुंच जाता है। इस हिसाब से 28 जून को पानी कछला तक पहुंच जाएगा। पानी की सूचना मिलते ही बाढ़ खंड के अधिकारियों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं। बांधो की मरम्मत का काम भी विभाग इस बार ठीक से नहीं कर सका है। बाढ़ बचाव के लिए गंगा पर पथरामई और रामगंगा पर नवादा मधुकर में काम जारी हैं। परक्यूपाइन स्टड समय पर नहीं बन सके तो बाढ़ यहां तबाही मचा सकती है।
पहली जून को ही स्थापित हो गया था कंट्रोल रूम
बाढ़ खंड की परंपराओं के अनुसार एक जून को बाढ़ खंउ का कंट्रोल रूम स्थापित हो जाता है। इस बार भी कंट्रोल रूम स्थापित हो गया है लेकिन डेमों से पानी छोड़ने के साथ ही इसकी सक्रियता मानी जाती है। शुक्रवार को हरिद्वार डेम से पानी छोड़े जाने की बड़ी सूचना के बाद से अब कंट्रोल रूम सक्रिय हो गया है।
सीजन के शुरू में ही बाढ़ खंड के ईई का तबादला
बाढ़ खंड को जब दिशा निर्देशक और बदायूं की स्थितियों के जानकार की जरूरत थी, शासन ने ठीक उसी समय बाढ़ खंड के एक्सईएन डीके जैन का तबादला कर दिया। उनकी जगह एक्सईएन इंतियाजुर्रहमान ने पदभार संभाला है। नवागत एक्सईएन को अभी जिले झ्की भौगोलिक स्थिति समझना होगा।