दातागंज। रामगंगा के जलस्तर में गिरावट जरूर देखी जा रही है, लेकिन पानी घटने के साथ कटान की गति और बढ़ती जा रही है। छह गांवों की करीब 300 बीघा जमीन एक सप्ताह में कट चुकी है। कटान का यह क्रम लगातार जारी है। रामगंगा का रुख रैपुरा, बिहारीपुर और नगरिया खनू की तरफ मुड़ा हुआ है। इससे इन गांवों को खतरा बढ़ गया है। इसी तरह सिमरिया गांव में रामगंगा का प्रवाह का रुख देखते हुए चार गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है।
नगरिया खनू रामगंगा पुल के पास और दबरा हार में नगरिया खनू और पड़ोस के गांव बिहारीपुर के अरुण कमार सिंह, भारत कुमार, अनिल कुमार सिंह, कमलेशा, धर्मवीर, राजकुमारी, जयेंद्र, किशन लाल, ओमपाल, वीरपाल शक्य, शिवम पंडित, लाल रतनाकर, वीरेश पाल सिंह आदि करीब 24-25 किसानों की करीब 200 बीघा जमीन पिछले एक सप्ताह में जल समाधि ले चुकी है। इनके गांवों में खेतिहर जमीन लंबे समय से कटान की जद में चल रही है। अकेले बिहारीपुर गांव के अवनीश कुमार सिंह के परिवार की 65 बीघा जमीन तो दो सालों में कट चुकी है।
इसी तरह नगरिया खनू गांव के अरुण कुमार सिंह, श्रीकृष्ण, कृष्णपाल सिंह के परिवारों की करीब 300 बीघा जमीन पिछले तीन सालों में बाढ़ की भेंट चढ़ चुकी है। इनके अलावा चकवा गांव की जमीन भी कट रही है। एक सप्ताह में 50 बीघा से अधिक जमीन नदी में समा चुकी है। बिहारीपुर, छेमराव, मकरंदापुर, रैपुरा, सिमरिया, गौंटिया शेरहा, बछलिया आदि कई गांवों में कृषि भूमि का कटान चल रहा है। नगरिया खनू रामगंगा पुल और एक्सप्रेस-वे पुल के बीच में कटान तेजी से चल रहा है। नदी के प्रवाह का रुख इस समय रैपुरा, बिहारीपुर और नगरिया खनू की तरफ मुड़ा हुआ है। इसी तरह सिमरिया गांव में भी कटान की दिशा गांव की तरफ चल रही है। नदी और इन गांवों का फासला लगातार कम होता जा रहा है, जिसकी वजह से इन गांवों को बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है।
कटान और रामगंगा के रुख पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। किसी भी विषम परिस्थिति के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। -विनोद कुमार सिंह, एसडीएम
कटान से भूमिहीन हो गए किसान, बाहर मजदूरी कर पाल रहे पेट
दातागंज। रामगंगा में जमीन कटने से बिहारीपुर गांव के अनेक संपन्न किसान भूमिहीन होकर मजदूरी करने को मजबूर हैं। ग्राम प्रशासक के मुताबिक गांव के वीरेश पाल सिंह तीन साल पहले तक संपन्न किसान थे। इनकी 27 बीघा जमीन रामगंगा में समा गई। वर्तमान में इन पर एक बिस्वा जमीन भी नहीं बची है। ओंकार सिंह के पास 12 बीघा जमीन थी, जिसमें आठ बीघा कट गई है। इसी तरह खेमकरण, रघुनंदन, विजयी, जयराम, जयपाल, परमेश्वरी आदि कई किसान ऐसे हैं, जिन पर अच्छी-खासी जमीन थी लेकिन अब नाममात्र की ही बची है। ग्राम प्रशासक कुलदीप ने बताया कि उनकी ग्राम पंचायत का कुल रकवा 2200 बीघा था जिसमें 350 बीघा एक्सप्रेस वे में चली गई और 450 बीघा रामगंगा काट चुकी है। जमीन न रहने की वजह से गांव की 30 प्रतिशत आबादी अन्य जनपदों में मजदूरी कर रही है। संवाद