कादरचौक। ब्लॉक कादरचौक के गांव नूरपुर समेत छह ग्राम पंचायतों में बहने वाली झील की करीब 150 बीघा जमीन पर अब भी माफिया ने कब्जा कर रखा है। हालांकि प्रशासन द्वारा बीच-बीच में अभियान चलाकर काफी झील की जमीन को कब्जा मुक्त कराया जा चुका है, लेकिन प्रशासन की लालूपुर व नगरिया में माफिया के आगे एक नहीं चली है। जिस कारण वे धीरे-धीरे झील पर और अधिक काबिज होते जा रहे हैं।
जिले की सदर तहसील के ब्लॉक कादरचौक के गांव नूरपुर गांव में कभी विशाल झील हुआ करती थी, जिसमें नूरपुर, लालूपुर, नगरिया समेत छह गांवों का रकबा शामिल था। मौजूदा समय में यह विशाल झील सूख चुकी है, जिस पर भूमाफिया अपना कब्जा जमा चुके हैं। हालांकि प्रशासन द्वारा समय-समय पर भूमाफिया के खिलाफ अभियान चलाया जाता रहा है, जिसके चलते प्रशासन ने लगभग तीन सौ बीघा जमीन को कब्जा मुक्त कराया है, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद भी इस झील से लालूपुर व नगरिया से करीब डेढ़ सौ बीघा जमीन अभी तक कब्जा मुक्त नहीं हो सकी है। इसकी एक वजह भूमाफिया को राजनीतिक संरक्षण हासिल होना बताया जा रहा है।
अधर में ही लटक गया सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव
-वर्ष 2007 में तत्कालीन बीडीओ सुभाष नेमा ने इस झील के सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव पास कराया था, साथ ही तत्कालीन जिलाधिकारी ने वहां का भ्रमण किया था। तब उन्होंने बाढ़ खंड को इसके सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना तैयार किए जाने को कहा था, लेकिन यह काम अधर में ही लटक गया।
- 2000 बीघा में फैली है झील
- 2007 में क्षेत्र पंचायत से हुआ सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव
- पहले जाड़ों के समय में ये झील साइबेरियन पक्षियों से गुलजार हुआ करती थी
- इस झील के रकबे में नूरपुर के अलावा, लालूपुर, नगरिया, भोजपुर, नरायनपुर, मामूरगंज और चौड़ेरा के रकबे में शामिल है।