बदायूं। चुनाव आयोग ने आचार संहिता लागू करने की घोषणा करके चुनावी रणभेरी बजा दी है। सभी प्रमुख दलों के योद्धा मुकाबले को तैयार हैं। अब तक की बात करें तो भाजपा खेमे ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है जिसे विपक्षी दल भी स्वीकार कर रहे हैं। रैली जनसभाओं पर रोक के बाद अब डोर टू डोर संपर्क व मीडिया के जरिये संवाद ही प्रत्याशियों की प्राथमिकता होगी। जनता जीत का सेहरा किस दल और प्रत्याशी के सिर बांधेगी, यह वक्त बताएगा।
आचार संहिता के साथ विधानसभा चुनाव का आगाज हो चुका है। राजनीतिक दल हरसंभव तरीके से जनता में पैठ बनाने को रस्साकशी कर रहे हैं। बसपा एक ऐसी पार्टी है जिसने प्रत्याशी चयन के मामले में सबसे आगे बढ़कर काम किया है। बसपा को केवल शेखूपुर और बिसौली में अपने प्रत्याशी घोषित करने बाकी हैं। बसपा नेताओं को यह भी यकीन है कि उनका परंपरागत वोटर उन्हें छोड़कर कहीं नहीं जाएगा। प्रत्याशी का निजी वोट इसमें जुड़कर जीत का रास्ता आखिर बन ही जाएगा।
वहीं भाजपा ने मुख्यमंत्री से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक की चुनावी रैलियां कराकर दूसरे दलों को प्रचार में पीछे छोड़ने का काम किया है। भाजपा सोशल मीडिया पर भी दूसरे दलों के मुकाबले ज्यादा सक्रिय है और बूथों तक पैठ का दावा करती है। वहीं सपा जिले में अपने पुराने वजूद और गांवों गली तक अपनी जड़ों को लेकर जीत के प्रति मुतमइन है। सहयोगी दलों के वोटबैंक से मिल रही ऑक्सीजन को भी सपा अपने लिए मुफीद मानती है। सड़क पर स्थानीय मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रही कांग्रेस महिलाओं को टिकट और संगठन की मजबूती से सीटें निकालने का दावा ठोंक रही है। छोटे दल भी तेवर में हैं और बड़े दलों से समझौते की बात कर गठबंधन से सीटें मिलने की आस संजोए हैं। कांग्रेस भाजपा और सपा के टिकट के अधिकतर दावेदार अपनी दावेदारी को पक्का मानकर गांव गली घूम रहे हैं। इन दलों के पास एक-एक सीट पर इतने प्रत्याशी हैं कि एक को टिकट मिलने पर दूसरों के पाला बदलने की भी पूरी गुंजाइश है। अब मतदाता ही तय करेंगे कि हवा का रुख क्या रहेगा।