-पांचवें दिन भी मालवीय आवास पर जारी रहा धरना प्रदर्शन
सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन रद्द किए जाने से आहत शिक्षामित्रों ने रविवार को पांचवें दिन भी मालवीय आवास पर धरना प्रदर्शन जारी रखा। इस मौके पर उन्होंने प्रदेश सरकार की बुद्धि-शुद्धि को हवन कराया। नाराज शिक्षामित्रों का कहना था कि सरकार जब तक उनकी मांगें नहीं मानेगी तब तक पूरे प्रदेश में इसी तरह से उनका आंदोलन जारी रहेगा।
बता दें कि शुक्रवार को आंदोलनकारी शिक्षामित्रों ने सड़कों पर झाड़ू लगाकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था तो शनिवार को हाथ में कटोरा लेकर भीख मांगी थी और इस दौरान जाम भी लगाया। रविवार को बड़ी संख्या में जुटे शिक्षामित्रों ने सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए हवन कराया। मालवीय आवास पर धरना प्रदर्शन में शामिल शिक्षामित्रों ने कहा कि यह हवन सरकार की गलत नीतियों में सुधार लाने के लिए कराया गया है ताकि समायोजित शिक्षकों के हित में सरकार उचित निर्णय ले सके और उनका खोया हुआ हक वापस मिल सके। हवन में शामिल शिक्षामित्रों ने कहा कि सरकार उनके हित में कोई कदम नहीं उठा रही है। धरना प्रदर्शन में अवनीश, जितेंद्र यादव, विनीत, कुंवरपाल, शिव सिंह, अवनीश शाक्य, अजीत, सुनील कुमार, ओमेंद्र, शराफत अली, बाबू सिंह, फिरोज, जहीरुल, फुरकान, अरविंद पटेल आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। ---------
संतुलित आंदोलन से पुलिस प्रशासन को मिली राहत
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रविवार को मालवीय आवास पर सरकार के खिलाफ बुद्धि-शुद्धि हवन का कार्यक्रम तय था। संभावना जताई जा रही थी कि हवन के बाद शिक्षामित्र हाईवे जाम कर सकते हैं या जुलूस निकाल सकते हैं। बड़ी तादाद में पुलिस फोर्स कांवड़ियों के लिए सुरक्षा इंतजाम में लगा हुआ था लेकिन शिक्षामित्रों ने रविवार को संयम से काम लिया और अपना आंदोलन सीमित रखा। हालांकि सोमवार को शिक्षामित्रों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ बड़े प्रदर्शन की बात कही।
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शिक्षा मित्र बोले
उदयवीर ने कहा कि शिक्षामित्रों के साथ जो अन्याय हुआ उस पर सरकार को सकारात्मक निर्णय करना चाहिए। सभी समायोजित शिक्षामित्रों को उसी पद पर बनाए रखना चाहिए। वरना उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।
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ब्रहमऋषि मिश्रा ने कहा कि 17 साल सरकार ने सेवा ली और अचानक बिना किसी प्रावधान के शिक्षामित्रों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस फैसले से शिक्षामित्रों का भविष्य अधर में है। हमारे साथ न्याय होना चाहिए।
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सुनीता ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह हमारे लिए बेहतर रास्ता निकाले ताकि हमारे साथ खड़ा हुआ नौकरी का संकट दूर हो सके। सड़क पर आए शिक्षामित्रों और उनके परिवार के साथ न्याय होना चाहिए।
आशा ने कहा कि अचानक लिए गए निर्णय से शिक्षामित्र बेहाल हैं, इस वक्त वह कुछ नहीं कर पा रहे हैं। सरकार को जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए जो शिक्षा मित्रों के हित में हो।