ई-प्रिजेंस योजना के तहत जिला जेल डिजिटल हो गई है। करीब 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। बाकी का काम भी जल्द पूरा हो जाएगा। इसके बाद बंदियों की कोर्ट में पेशी भी वीडियो कांफ्रेंस के जरिए कराई जा सकेगी। फिलहाल बंदियों और कैदियों से मुलाकात के लिए ऑनलाइन पर्ची का काम शुरू हो गया है। बंदियों और कैदियों से मुलाकात के लिए रोज 40 से 50 मुलाकाती ऑनलाइन पर्ची लगा रहे हैं।
ई-प्रिजेंस योजना के तहत पूरे सूबे की जेलों और सीसीटीएनएस के तहत पुलिस महकमा भी ऑनलाइन किया जा रहा है। थाना सिविल लाइंस सीसीटीएनएस के तहत पहला पेपर लेस थाना बन चुका है। ई-प्रिजेंस के तहत जेल भी डिजटल की गई है। जेल डिजिटल होने के बाद बंदियों और कैदियों से मुलाकात के लिए उनके परिवार वालों ने लोकवाणी और जनसेवा केंद्र के जरिए आवेदन करने शुरू कर दिए है। रात 40 से 50 लोग मुलाकात के लिए ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं। इससे घंटों लाइन में खड़े होने के झंझट से छुटकारा मिलने लगा है।
जिला जेल की क्षमता 529 बंदियों की है। इस समय जेल में कीब 2100 बंदी और कैदी बंद हैं। सैकड़ों बंदियों की रोज कोर्ट में पेशी होती है। जेल के पूरी तरह से डिजिटल हो जाने के बाद वीडियो कांफ्रेंस के जरिए पेशी शुरू हो सकेगी। इससे जेल प्रशासन की दुश्वारियां भी कम होंगी। बंदियों और कैदियों का पूरा डाटा डिजिटल होने से एक से अपराध करने वाले गिरोह के बारे में भी आसानी से जानकारी हो सकेगी।
स्टाफ की किल्लत से काम में देरी
बदायूं। जेल प्रशासन के पास प्रशिक्षित स्टाफ न होने की वजह से ऑनलाइन काम में दिक्कतें हो रही हैं। रोज करीब 500-600 लोग मुलाकात के लिए जेल पहुंचते हैं। स्टाफ न होने की वजह से सिर्फ 4-50 लोगों की ही ऑनलाइन पर्ची के जरिए मुलाकात हो पा रही है। जेल प्रशासन ने इस संबंध में उच्च अधिकारियों को लिखा है।
जेल अधीक्षक एलएन दोहरे का कहना है कि ई-प्रिजेंस योजना का काम लगभग पूरा हो गया है। सभी बंदियों और कैदियों का डाटा ऑन लाइन हो चुका है। बंदियों और कैदियों की उनके परिवार वालों से मुलाकात के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गए हैं। रोज करीब 50 लोग ऑनलाइन पर्ची के जरिए मुलाकात कर रहे हैं।