मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव मचलई में ताजियों के जुलूस के दौरान एक दीवार ढहाने के बाद एक ही संप्रदाय के दो पक्षों में हिंसक झड़प हो गई। दोनों ओर से हुई हवाई फायरिंग और पथराव में एक दरोगा समेत 13 लोग घायल हो गए। देर शाम तक एसडीएम सदर प्रदीप यादव, सीओ उझानी वंशराज यादव, सीओ दातागंज श्योराज सिंह और कई थानों की पुलिस गांव में तैनात थी। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति है।
मचलई गांव के पास स्थित करबला में आसपास के चार गांवों के ताजिए दफनाए जाते हैं। शनिवार को पड़ोसी गांव अल्लिया नगला से ताजियों का जुलूस मचलई स्थित करबला की ओर चला। शाम करीब साढ़े चार बजे जुलूस मचलई गांव पहुंचा। यहां कल्लू पुत्र अंसार के प्लाट की एक दीवार की वजह से ताजिया ले जाने में कुछ अड़चनें आई। इस पर अल्लिया नगला से प्रधानी के एक दावेदार ने गांव वालों के साथ मिलकर दीवार को ढहा दिया। यह बात मचलई के ग्रामीणों को नागवार गुजरी। उन्होंने विरोध किया, तो दोनों गांवों के बीच टकराव हो गया। दोनों ओर से फायरिंग और पथराव शुरू हो गया।
खबर मिलने पर मूसाझाग थाने के दरोगा शमीम हैदर दो सिपाहियों के साथ मौके पर पहुंचे। यहां ग्रामीणों ने पुलिस को दौड़ा दिया। पथराव में दरोगा शमीम हैदर समेत जाहिद (24) पुत्र दिलशाद, बसीर अहमद (23) पुत्र नत्थू, हासिम (25) पुत्र बाबू, अफजल (22) पुत्र दिलबाग, सज्जाद (20) पुत्र मुनब्बर, मोहम्मद शरीफ (27) पुत्र बाबू, महरुल (31) पुत्र ख्वाजिल, कमरुल (20) पुत्र मोहम्मद इस्लाम, जाबिर (19) पुत्र सलामत, आसिम (18) पुत्र मुन्ने शाह, आसिफ (21) पुत्र मझले और अब्दुल (35) घायल हो गए। मौके पर कई थानों की पुलिस को बुला लिया गया। इसके बाद दो घंटे तक जुलूस रुका रहा। बाद में एसडीएम सदर प्रदीप यादव, सीओ उझानी वंशराज यादव ने स्थिति को शांत कराया। शनिवार शाम सात बजे कड़ी सुरक्षा के बीच करबला में ताजिए दफ्न किए गए। गांव में एहतियातन पुलिस तैनात कर दी गई है।
पिछले साल भी हुआ था मचलई में बवाल
बदायूं। मूसाझाग के गांव मचलई में पिछले साल भी ताजिया जुलूस के दौरान बवाल हुआ था। पिछले साल ताजिया के जुलूस में गांव के एक मकान का छज्जा आ गया था। इस छज्जे को जुलूस में शामिल लोगों ने गिरा दिया था। इसके बाद दो पक्षों के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी। गांव में कई दिनों तक तनाव बना रहा था।
पुलिस बैकफुट पर, एसडीएम ने संभाली कमान
बदायूं। मूसाझाग के गांव मचलई में एक ही संप्रदाय के दो पक्षों के बीच टकराव के बाद थना पुलिस पूरी तरह से बैकफुट पर दिखी। दरअसल, दरोगा शमीम हैदर ने मौके पर पहुंचने के बाद सूझबूझ से स्थिति पर काबू करने के स्थान पर पुलिसिया रुख अपना लिया। इससे लोगों में गुस्सा भड़क गया। बाद में लोग पुलिस की किसी बात को मानने के लिए तैयार न हुए। अपरान्ह साढ़े चार बजे से सात बजे तक गांव में टकराव की स्थिति बनी रही। शाम को ताजियों के दफ्न होने के बाद मामला शांत हुआ।
प्रधानी की दावेदारी ने करा दिया बवाल
मूसाझाग। दीवार ढहा रहे ग्रामीणों का नेतृत्व अल्लिया नगला गांव का एक व्यक्ति कर रहा था। गांव से यह व्यक्ति प्रधानी का दावेदार है। ताजियों का जुलूस मचलई में पहुंचने पर रास्ते में कल्लू की दीवार गई। इस पर प्रधानी के दावेदार ने मामले को सांप्रदायिक रंग देने के लिए दीवार गिरवा दी। उसको नहीं पता था कि यह दीवार इसी संप्रदाय की है।
वर्जन-
स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। जिन खुराफाती तत्वों ने दीवार ढहाई है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कोई गंभीर घायल नहीं हुआ है। कुछ लोगों को पथराव में मामूली चोटें आई हैं। एहतियातन गांव में पुलिस तैनात कर दी गई है। किसकी चूक की वजह से घटना हुई, इसकी जांच कराई जाएगी।
-प्रदीप यादव, एसडीएम सदर