बदायूं। गंगा एक्सप्रेस-वे पर मिट्टी डालने का काम चल रहा है। मिट्टी ढो रहे डंपरों ने गांव के कच्चे रास्तों को दलदल जैसा बना दिया है। मंगलवार को हुई तेज बारिश के बाद स्थिति और भी खराब हो गई। इससे वजीरंगज और दातागंज क्षेत्र के 100 से अधिक गांवों के एक लाख लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। अगर निर्माण कंपनी और प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो इन लोगों को बरसात के दिनों में और ज्यादा परेशानी होगी।
वजीरगंज। क्षेत्र के गांव बनकोटा के पास निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेस वे पर मिट्टी डालने का कार्य चल रहा है। बनकोटा बरौर मार्ग, बनकोटा कुंवरगांव मार्ग, बनकोटा गरुइया मार्ग सहित कई दर्जन गांवों के संपर्क मार्गों पर जगह-जगह मिट्टी के ढेर लगे हैं। मार्गों से जुड़े लगभग तीन दर्जन से अधिक गांव के लोगों को इन्हीं मिट्टी के ढेरों से होकर गुजरना पड़ रहा है। मंगलवार को क्षेत्र में आधा घंटा जमकर बरसात हुई, फलस्वरूप जहां-जहां मिट्टी पड़ी हुई है वहां दलदल सी हो गई है। जगह-जगह पानी भर गया है, जिसकी वजह से लोगों के आने-जाने का रास्ता बंद हो गया।
दर्जन भर गांवों के लोगों का पैदल निकलना भी दूभर
दातागंज। जेसीबी से दिन-रात खेतों में मिट्टी की खोदाई की जा रही है। दर्जनों डंपर दिन रात इस मिट्टी को ढो रहे हैं। कासपुर से काशूनगला गांव तक कच्चा रोड है। मिट्टी से भरे डंपर चलने से यहां दो-दो फुट कीचड़ हो गई है। यहां वाहन चलाना तो दूर पैदल निकलना भी मुश्किल है। लोग खेतों की मेड़ो से पैदल ही आ जा रहे हैं। संवाद
क्या कहते हैं ग्रामीण
मोटरसाइकिल कासपुर गांव में खड़ी कर देते हैं। पैदल खेतों की मेड़ों से घर तक जाने को मजबूर हैं। ऐसे में अगर कोई बीमार पड़ जाए तो उसे रोड तक लाना बहुत मुश्किल होगा। यही हाल क्षेत्र के करीब एक दर्जन से अधिक गांवों का है। - ओमवीर सिंह, काशूनगला
खेतों में उपजाऊ मिट्टी दो तीन फुट गहराई तक होती है। इस मिट्टी का उठान जबरन किया जा रहा है इससे किसानों को दिक्कत हो रही है, लेकिन कुछ कर नहीं पा रहे। किसान की प्रशासन सुन नहीं रहा है। ऐसे में किसान क्या करें, किससे शिकायत करें, कुछ समझ नहीं आ रहा। बरसात के तीन महीने ऐसे ही काटने होंगे। - भूरे सिंह यादव, कासपुर
मामला संज्ञान में आया है। ग्रामीणों को समस्या हो रही है, इसको दिखवाकर ग्रामीणों की समस्या का समाधान कराया जाएगा। -कल्पना जायसवाल, एसडीएम, बिसौली
वजीरगंज के महेरा गांव के लोग दलदल से निकलते हुए। संवाद