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Budaun News: व्यावसायिक सिलिंडर महंगा होने से कहीं समोसा छोटा तो कहीं बढ़े दाम

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रोडवेज के पास भट्टी पर पकौड़ी बनाता कारीगर। संवाद
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बदायूं। व्यावसायिक सिलिंडरों के दाम बढ़ने का असर खाने-पीने की दुकानों पर दिखने लगा है। शहर के कई समोसा-चाय की दुकानों पर समोसे का साइज पहले से छोटा हो गया है। तो कहीं सात रुपये में मिलने वाला समोसा 10 रुपये का हो गया है। वहीं अधिकांश दुकानदारों ने भट्टी पर काम करना शुरू कर दिया है।
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सिलिंंडर पर बढ़े दामों को देखते हुए पूड़ी-सब्जी, छोले-भटूरे और अन्य नाश्ते की प्लेटों के दाम भी 5 से 10 रुपये तक बढ़ गए हैं। साथ ही कुछ दुकानदारों ने बार-बार सिलिंडर के बढ़ते दाम को देखते हुए उसका सहारा लेना ही बंद कर दिया है। वह लकड़ी और कोयले की भट्टी पर खाना और नाश्ता बना रहे हैं। ताकि लागत कम आए और उनका काम सही तरीके से चलता रहे।
दुकानदारों का कहना है कि सिलिंडर पहले से ही बढ़ी मुश्किल में मिल रहा था। व्यावसायिक सिलिंडर पर 100 से 150 रुपये तक बढ़ते तो कोई दिक्कत नहीं होती, एक दम 50 फीसदी दाम बढ़ने से काम पर असर पड़ रहा है। तेल, मसाले और सब्जियों के दाम भी पहले से बढ़े हुए हैं। ऐसे में बिना रेट बढ़ाए या सामान छोटा किए काम चलाना मुश्किल है।
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वहीं ग्राहकों का कहना है कि महंगाई की मार सीधे उनकी जेब पर पड़ रही है। पहले जो नाश्ता 20 रुपये में हो जाता था, अब उसके लिए 30 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं साइज छोटा होने से पेट भी नहीं भर रहा।


दुकानदारों ने बताई अपनी-अपनी परेशानी-

रोडवेज के पास नाश्ते की दुकान चलाने के वाले सोहन ने बताया कि वह पहले सिलिंडर उपयोग में लाया करते थे। व्यावसायिक सिलिंडर महंगा होने के बाद से गैस का उपयोग करना बंद कर दिया है। अब भट्टी पर ही समोसे, पकौड़ी आदि सामान तैयार किया जा रहा है।


कचहरी रोड पर ढाबा चलाने वाले लक्ष्मी कश्यप ने बताया कि वह पहले गैस का उपयोग करते थे। दाम बढ़ने पर कोयले और लकड़ी की भट्टी के माध्यम से खाना बनाना शुरू कर दिया। अब इस पर कारीगरों को काम करने की आदत भी हो गई है। ग्राहकों को भी यह खाना पसंद आ रहा है।

रोडवेज के पास भट्टी पर पकौड़ी बनाता कारीगर। संवाद

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