डीआरडीए से जुड़े महत्वपूर्ण विकास कार्यों का तकनीकी सत्यापन नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह है कि डीआरडीए में अपने सहायक अभियंता तक नहीं है। यहां अस्थाई तौर पर पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता रमेश चंद्र साहू को यहां का अतिरिक्त भार दे रखा है, लेकिन हालात यह हैं कि न पीडब्ल्यूडी के काम ठीक से हो पा रहे हैं और न डीआरडीए के सत्यापन जैसे महत्व के कार्य निपटा पा रहे हैं। खुद डीआरडीए के परियोजना निदेशक रामरक्षपाल सिंह ने भी स्वीकारा है कि स्थायी तौर पर सहायक अभियंता की व्यवस्था न हो पाने के कारण विभागीय कार्य में कठिनाइयां हो रही हैं।
डीआरडीए में सहायक अभियंता साजिदुल्ला को हटाए जाने के बाद डीआरडीए के तकनीकी कार्यों की व्यवस्था सुचारू रखने को अस्थाई तौर पर पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता साहू को यहां का अतिरिक्त चार्ज दे दिया गया था। साहू ने यहां चार्ज तो ले लिया लेकिन पीडब्ल्यूडी और डीआरडीए के दोनों जगह के काम पूरी तरह से नहीं हो पा रहे हैं। हालात नाजुक होने लगे तो डीआरडीए के कर्मचारी भी परेशान होने लगे। बात अधिकारियों तक पहुंचने लगी। डीआरडीए के कर्मचारियों को फाइलें लेकर भटकना पड़ने लगा। कर्मचारियों को सहायक अभियंता उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे।
सहायक अभियंता पर अतिरिक्त कार्यभार होने के कारण कठिनाइयां आ रही हैं। प्रयास किए जाएंगे कि डीआरडीए में स्थाई रूप से सहायक अभियंता नियुक्त हो सके।
- राम रक्षपाल सिंह यादव, पीडी, डीआरडीएम