बदायूं। पंचायत सचिवालय अव्यवस्था का शिकार होते जा रहे हैं। जिन सचिवालयों को ग्रामीणों की समस्या के समाधान और सरकारी योजनाओं का केंद्र बनना था। वहां पर ताले लटके हैं और कहीं तो पंचायत सहायक ही गायब हैं।
सरकार ने पंचायत सचिवालयों को गांव स्तर पर मिनी प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी। जिससे ग्रामीणों को प्रमाणपत्रों, पेंशन, आवास, मनरेगा, परिवार रजिस्टर, जन्म-मृत्यु संबंधी दस्तावेज, किसान पंजीकरण, शिकायतों और ऑनलाइन सेवाओं के लिए शहर या तहसील न जाना पड़े। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि कई सचिवालय नियमित रूप से नहीं खुल रहे हैं। शनिवार को ग्राम पंचायतों भवन की पड़ताल की गई तो स्थिति चिंताजनक मिली।
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नरऊ खुर्द का पंचायत सचिवालय कई माह से बंद मिला
ग्राम पंचायत नरऊ खुर्द का पंचायत भवन दोपहर 1:38 बजे बंद मिला। पंचायत सहायक रमेश यादव से फोन पर जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि वह गांव में जाकर फैमिली आईडी बना रहे हैं। ग्रामीणों से जानकारी करने पर उन्होंने बताया कि पंचायत भवन बंद ही रहता है। ऑनलाइन फाॅर्म संबंधी कार्य जनसेवा केंद्रो से कराने से पड़ते हैं।
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मिढ़ौली मिर्जापुर पर लटका मिला ताला
पंचायत भवन पर 12:52 बजे तक गेट पर ताला लटका मिला। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि जब पंचायत सचिव नियुक्ति हुई थी। तब तो पंचायत भवन प्रतिदिन खुलता था। लेकिन अब काफी दिनों से कभी- कभी ही खुलता है। लोगोें को फार्म संबंधी काम कराने के लिए जनसेवा केंद्रो और कैफे पर जाना पड़ता है।
पंचायत भवनों का खुलने का समय सुबह 10 बजे से 5 बजे तक है, वहां पर पंचायत सचिव का बैठना अनिवार्य है, अगर कही पंचायत भवन नहीं खुल रहे हैं तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
यावर अब्बास, डीपीआरओ
ग्राम पंचायत मिढौली मिर्जापुर में बंद पड़ा पंचायत भवन। संवाद