बदायूं। जिला अस्पताल के चिकित्सक बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। साथ ही वह निजी अस्पताल भी चला रहे हैं। मरीजों ने बताया कि कई चिकित्सक सरकारी अस्तपाल में देखने के बजाय मरीजों को अपने अस्पताल में बुलाते हैं। इससे मरीजों पर इलाज खर्च का बोझ बढ़ गया है।
मौसम में आए बदलाव और गर्मी के कारण जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। सबसे ज्यादा मरीज आर्थोपेडिक और फिजिशियन की ओपीडी में भीड़ दिखी। डॉक्टर को दिखाने के लिए मरीज को 10 से 15 मिनट का तक इंतजार करना पड़ा। भीड़ के बीच फिजिशियन की ओपीडी के बाहर लगा पंखा खराब होने से मरीजों को परेशानी हुई। इसी तरह दवा वितरण कक्ष के बाहर दोपहर 12 बजे महिलाओं की दो लंबी लाइन लगी हुई थीं। दवा के लिए उन्हें आधे घंटे तक लाइन में लगना पड़ा। मरीज रुबिना ने बताया कि छोटा बच्चा साथ लेकर अस्पताल आई है। बच्चे को गोद में लेकर आधा घंटा तक लाइन में लगी रही। इसके अलावा दवा वितरण कक्ष के बाहर कई ऐसे मरीज मिले, जिन्हें नेत्र रोग विभाग के डाॅक्टरों ने बाहर से दवा लिख दी थी। उन्हें अस्पताल से दवाएं नहीं मिली। वहीं कई मरीजों ने बताया कि उन्हें चिकित्सकों ने अपने अस्पताल में देखने के लिए बुलाया है।
देरी से आता स्टाफ व डाॅक्टर
जिला अस्पताल में सुबह आठ बजे से ओपीडी शुरू हो जानी चाहिए, लेकिन डॉक्टर व स्टाफ नौ बजे से पहले नहीं आते हैं। सुबह आठ बजे मरीज पहुंच गए लेकिन डाक्टर के न बैठने से उन्हें घंटेभर इंतजार करना पड़ा।
महिला डॉक्टर की जांच नहीं हो सकी पूरी
जगत सीएचसी में तैनात डॉ. आकांक्षा ने अपने घर में ही एक गर्भवती का प्रसव कराया था। इससे महिला की हालत बिगड़ गई तो उसे रेफर कर दिया। इस मामले में एडी हेल्थ ने सीएमओ को जांच के निर्देश दिए थे। उन्होंने अपने पत्र में जिक्र किया था कि पहले भी डॉ. आकांक्षा की निजी प्रैक्टिस की शिकायत आ चुकी है। मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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केस एक
आंख से आंसू और दर्द की वजह से डाॅक्टर को दिखाया तो उन्होंने एक ड्रॉप बाहर का लिख दिया। 140 रुपये खर्च करके मेडिकल स्टोर से ड्रॉप खरीदा था। अन्य दवाएं अस्पताल के अंदर से ही मिल गईं।
- विमलेश कुमारी, मुर्गरा जरासी
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केस दो
पेट में दर्द, दस्त और बुखार है। इस वजह से ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने आए थे। डॉक्टर ने कहा कि यहां की दवा से आराम नहीं मिलेगा। घर पर आओ, अच्छी दवा देंगे।
- वीरेश कुमार, कुलचोरा
- शासन के निर्देश हैं कि डॉक्टर मरीजों को बाहर की दवा न लिखें। कोई डॉक्टर मरीज को अपने निजी अस्पताल में बुलाने का दबाव बनाते हैं तो उनके खिलाफ करवाई जाएगी। अस्पताल में सभी तरह की दवाएं पर्याप्त हैं। - डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस
विमलेश कुमारी
विमलेश कुमारी