बदायूं। जिले में बदहाल होते जा रहे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य विभाग ने 20 बेड के वार्ड का निर्माण कार्य शुरू कराया है ताकि मरीजों की संख्या बढ़ने पर उनको जिला अस्पताल रेफर न करना पड़े। अन्य संसाधन बढ़ाए जाने का दावा भी किया जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि जहां पूरे जिले में डॉक्टरों की कमी है तो ये वार्ड कितने उपयोगी साबित होंगे।
स्वास्थ्य विभाग सभी सीएचसी के साथ ही न्यू पीएचसी का उच्चीकरण कराने पर जोर दे रहा है। इसके तहत सबसे पहले बेड बढ़ाए जा रहे हैं। हालांकि पहले से सीएचसी पर 30 बेड मौजूद हैं जो संक्रामक रोगों के फैलने पर कम पड़ जाते हैं। मरीजों की संख्या एक साथ बढ़ती है तो सीएचसी पर मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड नहीं बचते हैं। इस पर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। इससे देहात के मरीजों को परेशानी होती है।
स्वास्थ्य विभाग सभी सीएचसी और पीएचसी पर बेहतर इलाज दिए जाने का दावा करता है, लेकिन संक्रामक रोग फैलने पर यह दावे हवा-हवाई साबित हो जाते हैं। इस समस्या को देखते हुए इस बार सभी सीएचसी पर 20-20 बेड बढ़ाए जा रहे हैं। इससे सीएचसी पर अब एक साथ 50 मरीज भर्ती हो सकेंगे। सीएचसी के अलावा न्यू पीएचसी पर भी छह-छह बेड बढ़ाए जाने का कार्य भी शुरू करा दिया गया है।
ऑपरेशन थियेटर भी चालू करने पर दिया जा रहा जोर
सभी सीएचसी पर अतिरिक्त वार्ड बनाने के साथ ही ऑपरेशन की भी सुविधा शुरू कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत सभी सीएचसी पर ऑपरेशन की सुविधा भी शुरू की जाएगी। इससे ऑपरेशन से प्रसव होने वाली गर्भवती को अब जिला अस्पताल रेफर नहीं किया जाएगा। सभी सीएचसी पर स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती कर ऑपरेशन थियेटर चालू किया जाएगा।
204 के सापेक्ष तैनात हैं महज 70 डॉक्टर
स्वास्थ्य विभाग ने सीएचसी पर बेहतर इलाज दिलाए जाने का दावा किया है। सभी सीएचसी पर इसके लिए वार्ड भी बढ़ाए जा रहे हैं। मगर, सवाल है कि स्वास्थ्य विभाग के पास डॉक्टर ही नहीं हैं तो वह किस तरह से इन वार्डों का उपयोग कर पाएगा। स्वास्थ्य विभाग के पास 204 डॉक्टरों के पद हैं जबकि तैनाती महज 70 डॉक्टरों की है। इसमें अधिकारी भी शामिल हैं जो सिर्फ प्रशासनिक कार्य देखते हैं।
न्यू पीएचसी पर भी तैनात नहीं हैं डॉक्टर
सीएचसी के साथ-साथ न्यू पीएचसी पर भी बेड बढ़ाए जा रहे हैं। यहां भी बेड बढ़ाने से मरीजों को कोई फायदा मिलता दिखाई नहीं देने वाला, क्योंकि न्यू पीएचसी पर डॉक्टर ही तैनात नहीं हैं। डॉक्टरों की तैनाती न होने की वजह से वहां कर्मचारी ही मरीजों को कभी-कभार देखते हैं।
- सभी सीएचसी पर 20 बेड के वार्डों का निर्माण शुरू करा दिया गया है। सीएचसी के साथ-साथ न्यू पीएचसी पर भी बेड बढ़ाए जा रहे हैं। इसके अलावा सभी सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त संसाधन मुहैया कराए जाएंगे और ऑपरेशन थियेटर की भी व्यवस्था की जाएगी। डॉक्टरों की कमी को भी पूरा प्रयास किया जा रहा है। - डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ