दिल्ली से सीएमओ कार्यालय पहुंचीइंटेलिजेंस की टीम। संवाद
बदायूं। दिल्ली में नौकरी के लिए फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र लगाए जाने के मामले की जांच सोमवार को बदायूं तक पहुंच गई। दोपहर बाद इंटेलीजेंस की टीम सीएमओ कार्यालय पहुंची और दिव्यांग बोर्ड से जुड़े डॉक्टरों व पटल सहायकों से पूछताछ की। टीम करीब तीन घंटे तक सीएमओ कार्यालय में मौजूद रही। इस दौरान प्रमाणपत्र जारी करने से संबंधित प्रक्रिया और अभिलेखों की जानकारी जुटाई गई। देर शाम टीम लौट गई।
चर्चा है कि दिल्ली में नौकरी के लिए लगाए गए कुछ दिव्यांग प्रमाणपत्र बदायूं से जारी हुए हैं। दिल्ली में रहने वाले कुछ लोगों ने आधार कार्ड में पता बदलवाकर खुद को बदायूं का निवासी दर्शाया और यहां से दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवा लिए। इन्हीं प्रमाणपत्रों की जांच के सिलसिले में टीम ने सीएमओ कार्यालय पहुंचकर जानकारी जुटाई।
टीम ने दिव्यांग बोर्ड कमेटी में शामिल नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पियूष मोहन अग्रवाल, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. एमएस सिद्दीकी, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रियाज से पूछताछ की और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया के बारे में पूछताछ की। टीम ने पूछा कि संबंधित मरीजों की जांच किस तरह हुई, प्रमाणपत्र जारी करने के दौरान कौन से दस्तावेज लिए गए, इस संबंध में जानकारी ली गई। इसके बाद पटल सहायक शेर सिंह सोलंकी, हरीश से भी संबंधित रिकॉर्ड और प्रमाणपत्रों के बारे में पूछताछ की गई।
अभिलेखों की भी जुटाई जानकारी
इंटेलिजेंस टीम ने प्रमाणपत्रों से जुड़े अभिलेखों की जानकारी भी ली। बताया जा रहा है कि टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जिन लोगों के प्रमाणपत्र दिल्ली में नौकरी के लिए लगाए गए, उनके दस्तावेजों में बदायूं का पता किस आधार पर दर्ज हुआ। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि प्रमाणपत्र जारी करने से पहले दिव्यांग बोर्ड के समक्ष संबंधित लोगों की जांच हुई थी या नहीं।
बरेली में पिछले दिनों एक घटना क्रम हुआ था। उसी सिलसिले में यहां पर टीम आई थी। उन्होंने दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने वाले बोर्ड की टीम से बात की। -डॉ. विकास शर्मा, सीएमओ