बदायूं। सरकारी अस्पतालों में मरीज तो देखे जा रहे हैं लेकिन जांच के लिए निजी केंद्रों पर जाना उनकी मजबूरी है। जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद है। मरीजों को मोटा पैसा देकर बाहर से ही जांच करानी पड़ती है। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की भी व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है।
जिला अस्पताल में 250 बेड और जिला महिला अस्पताल में 120 बेड की व्यवस्था है। इसके अलावा 300 बेड का राजकीय मेडिकल कॉलेज है। यहां सिर्फ राजकीय मेडिकल कॉलेज में दो और जिला अस्पताल में एक सरकारी अल्ट्रासाउंड सेंटर काम कर रहा है। जिला महिला अस्पताल में भी अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था है, लेकिन यहां रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण लंबे समय से अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे। गर्भवती महिलाओं को निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर पर ही जाने को मजबूर होना होता है। गौर करने की बात यह है कि जिला अस्पताल में अगर डॉक्टर किसी रोगी को अल्ट्रासाउंड कराने का सुझाव देता है तो यहां अल्ट्रासाउंड के लिए लंबी कतार रहती है। रोगी का नंबर आने में 10-15 दिन तक लग जा रहे हैं, तब तक बीमारी का स्तर ही बदल जाता है। हालांकि, रसूखदार लोगों के अल्ट्रासाउंड जल्दी हो जाते हैं।
जिले में 17 सीएचसी और एक पीएचसी के अलावा पांच अर्बन हेल्थ पीएचसी भी हैं। यहां प्रसव की व्यवस्था है लेकिन कहीं भी सरकारी तौर पर अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है। सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड के नाम पर बिल्सी और बिसौली में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के आधार पर निजी फर्म से काम लिया जा रहा है। हालांकि यहां भी अल्ट्रासाउंड के नाम पर खेल हो रहा है। गौर करने की बात यह है कि जिले में निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर की संख्या 54 है लेकिन रेडियोलॉजिस्ट सिर्फ चार ही हैं। इसके बाद भी निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर धड़ल्ले से चल रहे हैं। तमाम निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर मानकों को भी पूरा नहीं कर रहे।
गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी
जिला महिला अस्पताल में रोज आठ से नौ सौ महिलाएं ओपीडी में पहुंचती हैं। इनमें ज्यादातर गर्भवती होती है। इन महिलाओं को जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा ही नहीं मिल रही। गर्भवती महिलाओं को निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर ही जाना होता है। उनको इसमें काफी परेशानी होती है। सीएचसी, पीएचसी के स्तर पर भी अल्ट्रासाउंड नहीं होते। गौर करने की बात यह है कि जिला अस्पताल में पेट की बीमारियों से संबंधी रोगियों के अल्ट्रासाउंड होते हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोज औसतन एक हजार लोग पहुंचते हैं। इन दिनों पेट संबंधी बीमारियों का ज्यादा प्रकोप है। ऐसे में अल्ट्रासाउंड कक्ष में लाइन लगी रहती है।
लिंग परीक्षण को भी मिल रहा बढ़ावा
निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर पर लिंग परीक्षण भी होते हैं, जबकि यह कानूनन अपराध है। दरअसल, ज्यादातर निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर बिना रेडियोलॉजिस्ट के चल रहे हैं। मानकों को दरकिनार करते हुए हर वर्ष पुराने अल्ट्रासाउंड सेंटर का नवीनीकरण कर दिया जाता है और स्वास्थ्य विभाग नए अल्ट्रासाउंड सेंटर को भी लाइसेंस जारी करता रहता है। सरकारी अल्ट्रासाउंड सेंटर से हजार गुना ज्यादा ज्यादा अल्ट्रासाउंड निजी सेंटरों पर होते हैं। निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर लिंग परीक्षण को लेकर अक्सर विवादों में रहते हैं।
फैक्ट फाइल
सीएचसी- 17
पीएचसी-एक
अर्बन पीएचसी-पांच
अल्ट्रासाउंड सेंटर निजी- 54
मेडिकल कॉलेज- दो
जिला अस्पताल-एक
जिला महिला अस्पताल-एक
रेडियोलॉजिस्ट-चार
मानकों के अनुसार ही अल्ट्रासाउंड सेंटर के लाइसेंस जारी होने चाहिए। हर वर्ष नवीनीकरण में भी मानकों को परखा जाना चाहिए। लिंग परीक्षण कानूनी अपराध है। सरकारी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट की कमी है। बदायूं के जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट है। वहां सेवाएं मिल रही हैं। कुछ सीएचसी पर भी अल्ट्रासाउंड की सेवा है। अगर कहीं पर कोई कमी है तो उसे दुरुस्त कराया जाएगा। - डॉ. दीपक ओहरी, एडी हेल्थ