महिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़। संवाद
बदायूं। महिला अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार की दोपहर 12 बजे तक एक भी डॉक्टर नहीं पहुंचा। मरीजों ने सीएमएस से शिकायत की तो सीएमएस खुद बाल रोग विशेषज्ञ बन गए और बच्चों को देखकर दवा दी। सीएमएम ने फोन कर एक महिला डॉक्टर को बुलाया तब कहीं जाकर मरीजों को दवा मिल सकीं।
महिला अस्पताल में चार डॉक्टर ओपीडी करते हैं। लापरवाही यह रही कि दो डॉक्टर को अवकाश दे दिया गया और एक डॉक्टर काम से गई थीं। एक घर से ही नहीं निकली थीं। इस तरह ओपीडी से सभी डॉक्टर नदारद हो गए।
ओपीडी में रोस्टर के हिसाब से डॉक्टरों की डयूटी लगाई जाती है। मंगलवार को डॉ. अनामिका चौहान, नाजिया अख्तर की ओपीडी में ड्यूटी लगाई गई थी। अनामिका चौहान कोर्ट में सरकारी काम से गईं थीं। डॉ. नाजिया ड्यूटी पर ही नहीं पहुंची थी। डॉ. सुकुमार अग्रवाल और राविया अवकाश पर थे। एक भी डॉक्टर 12 बजे तक ओपीडी में नहीं पहुंचा जिससे दवा लेने अस्पताल आए मरीज डॉक्टरों का इंतजार करते रहे।
परेशान होकर मरीजों ने सीएमएस डॉ. इंदुकांत वर्मा से शिकायत की। उन्होंने फोन कर डॉ. नाजिया को तत्काल अस्पताल बुलाया। उन्होंने ओपीडी जाकर देखी तो वास्तव में ही कोई डॉक्टर नहीं था। इसके बाद सीएमएस ने बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी संभाली और बच्चों को देखकर दवा दी। वहीं नाजिया भी 12 बजे के बाद ओपीडी पहुंची और मरीजों को देखा। दवा लेने आए मरीजों को चार घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
दो डॉक्टर अवकाश पर थे। एक डॉक्टर को न्यायालय में सरकारी काम से जाना पड़ गया। बाल रोग विशेषज्ञ की एसएनसीयू में थे। इसी वजह से ओपीडी में कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा। जानकारी होने पर डयूटी से गायब डॉ. नाजिया को बुलाया गया। खुद भी मरीजों को देखकर दवा दी। जो डॉक्टर डयूटी से नदारद रहे हैं, सभी का जवाब तलब किया गया है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
महिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़। संवाद