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अब गली-कूंचों में चलने वाले फर्जी स्कूलों पर कसेगी नकेल

Sat, 10 Mar 2018 06:39 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बदायूं
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DM Budaun
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जिले के उन शिक्षा माफिया के लिए यह खबर आने वाले दिनों में बेहद कष्टकारी साबित होगी जो बिना मान्यता के ही सेटिंग के चलते किसी भी तरह के स्कूल चला रहे हैं। डीएम दिनेश कुमार सिंह की नजर ऐसे स्कूलों पर है। इन स्कूलों को बंद कराने के लिए विभागीय के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरी योजना बना ली है। जिसके तहत सभी तहसील स्तर पर ऐसे स्कूलों को चिह्नित किया जा रहा है। 15 मार्च से उन्हें बंद कराने के लिए सघन अभियान चलेगा। यह ध्येय है कि एक अप्रैल से कोई फर्जी स्कूल-कॉलेज चलता न मिले।

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जहां पर भी ऐसे स्कूल चलते पाए जाएंगे, वहां उन स्कूलों के संचालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। साथ ही इस गोलमाल में शामिल विभागीय अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई को शासन को लिखा जाएगा। 
शासन का पूरा फोकस शिक्षा पर है। शिक्षा में गुणात्मक सुधार हो इसके लिए कई योजनाएं बनाई जा रहीं हैं तो कई योजनाओं को लागू भी किया जा चुका है। सरकारी स्कूलों में बच्चों की घटती संख्या को लेकर भी शासन बेहद गंभीर है। इसके पीछे जो निकलकर आया है वह यह है कि गली-कूंचों में बिना मान्यता और सेटिंग के चलते स्कूल चलाए जा रहे हैं। तमाम शिक्षा माफिया ऐसे स्कूलों के सहारे बच्चों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। जिले में हर तहसील क्षेत्र में काफी संख्या में इस तरह के स्कूल संचालित हैं जहां पर बच्चों को बैठने के लिए टाट-पट्टी तक नहीं है। ऐसे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे खुद ही अपने बैग में कट्टा (बोरा) रखकर लाते हैं। हालांकि हर साल फर्जी तरीके से चलने वाले स्कूलों के बारे में शिकायतें होतीं हैं मगर चूंकि विभागीय अधिकारियों से सेटिंग होती है या फिर राजनीतिक दबाव के चलते इन स्कूल संचालकों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं होती है। इधर, जिले की कमान संभालने के बाद से डीएम दिनेश कुमार सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उनका कहना है कि जब शिक्षा सुधर जाएगी तो समाज में भी काफी बदलाव आएगा। 
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शिक्षा विभाग के सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों डीएम ने एक मीटिंग लेकर इस बात के स्पष्ट निर्देश दिए कि फर्जी स्कूल किसी हाल में जिले के अंदर नहीं चलेंगे। जो चल रहे हैं उनकी सूची बनाई जाए। बोर्ड परीक्षा के खत्म होने के तुरंत बाद अभियान चलाकर इन स्कूल-कॉलेजों को बंद कराने की कार्रवाई की जाए। पहले नोटिस दिया जाए और बाद में संचालकों पर एफआईआर कराई जाए। सूत्रों ने बताया कि इसके लिए पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।
 

फर्जी स्कूलों के जरिए डकारते रहे हैं वजीफा 
बदायूं। जो भी फर्जी स्कूल चलाते हैं उसके पीछे उनके संचालकों की यहीं मंशा रहती है कि किसी तरह शासन से बच्चों को दिया जाने वाला वजीफा हड़पा जा सके। हर साल शिकायतें होती हैं मगर उनकी सेटिंग इतनी अच्छी होती है कि शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की जाती है। उल्टे संचालकों को शिकायत के बारे में बताते हुए सतर्क कर दिया जाता है। 

कोचिंग का कराते हैं रजिस्ट्रेशन, चलाते हैं स्कूल-कॉलेज 
बदायूं। देखने में आया है कि तमाम लोग कोचिंग का रजिस्ट्रेशन कराते हैं। रजिस्ट्रेशन कराते वक्त वह कुछ स्टूडेंट्स का उसमें उल्लेख करते हैं और उसी के हिसाब से फीस अदा करते हैं, लेकिन चलाते वह कॉलेज की तरह कक्षाएं हैं। चूंकि उनकी जड़ें मजबूत होती हैं इसलिए जब कभी टीम मौके पर जाती है तो रजिस्ट्रेशन के समय दर्शाए गए बच्चे ही पढ़ते मिलते हैं। 

डिवीजन भी तय करते हैं संचालक 
बदायूं। फर्जी स्कूल-कॉलेजों के संचालक उनके यहां दाखिला लेने वाले स्टूडेंट्स से हर तरह की डिवीजन दिलाने की भी बात तय कर लेते हैं। उसी के हिसाब से वह स्टूडेंट्स से धनराशि वसूलते हैं। चूंकि जिले के कई कॉलेज इसके लिए पूर्व से बदनाम चल रहे हैं। 

डीएम के निर्देश पर फर्जी स्कूल-कालेजों के खिलाफ अभियान चलेगा। एक अप्रैल से जिले के अंदर बिना मान्यता का कोई स्कूल चलता नहीं मिलेगा। यदि कहीं पर चलता भी है तो संबंधित क्षेत्र के विभागीय अधिकारी को जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ भी एक्शन लिया जाएगा। 
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- मुन्ने अली,डीआईओएस बदायूं
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