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Budaun News: रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुए डीएम, फाइल लौटाकर दोबारा जांच के निर्देश

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सहसवान की विवादित जमीन और कर्मचारियों पर कार्रवाई का मामला सहसवान के तत्कालीन तहसीलदार, एसडीएम के स्टेनो फंसे हैं जमीन के मामले में
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संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। सहसवान की विवादित जमीन समेत अन्य बेनामी संपत्तियां खरीदने वाले अधिकारी और कर्मचारियों पर डीएम मनोज कुमार द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद अधिकारियों ने जांच की औपचारिकता निभाई तो डीएम ने इस पर असंतुष्टि जताते हुए फाइल लौटा दी। डीएम ने साफ कहा है कि इन मामलों की जांच सही से होनी चाहिए। डीएम द्वारा दोबारा जांच के निर्देश दिए गए हैं।
कुछ साल पहले सहसवान के शहवाजपुर स्थित गाटा संख्या 118, 119, 120, 143,145 आदि को 88 लाख में खरीदकर प्लाटिंग करके करोड़ों में बेच दिया गया था। इसमें सहसवान में उन दिनों तैनात रहे कई कर्मचारियों की भी पार्टनरशिप रही। इन कर्मचारियों ने 44 साल बाद पाकिस्तान जाने वाले लोगों के फर्जी वारिस पैदा कर दिए। कोई बैनामा न होने के बाद भी फर्जी तरीके से वरासत कराकर और फिर पावर ऑफ अटार्नी के माध्यम से जमीन को खरीदकर करोड़ों के वारे न्यारे कर लिए गए।
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इसके अलावा सहसवान के ही जमशेद उर्फ गुड्डू की एक और शिकायत के मामले में सहसवान के तत्कालीन तहसीलदार धीरेंद्र कुमार, एसडीएम के तत्कालीन स्टेनो आशीष सक्सेना समेत कई कर्मचारियों के नाम इस फर्जीवाड़े में आए। इन लोगों की तत्कालीन एडीएम प्रशासन रामनिवास शर्मा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय कमेटी जांच में भी ये लोग दोषी पाए गए, लेकिन अधिकारियों के स्थानांतरण होने के साथ ही ये लोग मामले को दबाते चले गए। अमर उजाला द्वारा इस घपलेबाजी को उजागर करने के बाद डीएम मनोज कुमार ने इन दोनो मामलों को संज्ञान में लेकर पुरानी फाइलें निकलवा ली और तत्कालीन एडीएम एफआर संतोष कुमार वैश्य को इसकी जांच करने के निर्देश दिए।
सूत्रों का कहना है कि चूंकि दोषी कर्मचारी अब जिला मुख्यालय पर ही विभिन्न कार्यालयों में तैनात हैं, इसलिए उन्होंने जांच प्रभावित करने के उद्देश्य से तमाम हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए। बताते हैं कि कर्मचारियों ने किसी तरीके से मनमानी रिपोर्ट लगवाकर डीएम को फाइलें प्रेषित करा दी, लेकिन डीएम इससे संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने फाइलें यह कहकर लौटा दीं, कि ये मामले गंभीर हैं और इनकी जांच सही तरीके से होनी चाहिए।




डीएम द्वारा फाइलें लौटाने के बाद अब कर्मचारी एक बार फिर किसी तरह जांच को प्रभावित करने में लगे हैं। डीएम के अनुसार, तत्कालीन एडीएम एफआर का तबादला होने के बाद इन मामलों की जांच अब मौजूदा एडीएम एफआर राकेश कुमार पटेल कर रहे हैं।
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हर तरह की कारगुजारी करने में महारत है दोषी कर्मचारियों को
- इस मामले में जो कर्मचारी शामिल हैं, उन्होंने पूरा ग्रुप बना रखा है। सहसवान में तैनाती के दौरान उन्होंने स्थानीय लेखपाल, कानूनगो आदि से मिलकर कई सरकारी जमीनों पर कब्जा करके उन्हें बेच डाला। बताते हैं कि ये कर्मचारी हर प्रलोभन देकर अधिकारियों को भी गुमराह करने की महारत रखते हैं। सत्ताधारी पार्टी के कुछ नेता भी इन मामलों में शामिल हैं जो इन कर्मचारियों को संरक्षण दे रहे हैं।
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इस मामले की जांच एडीएम एफआर कर रहे हैं। पूर्व एडीएम ने जो रिपोर्ट लगाकर दी थी, उससे संतुष्ट नहीं थे। जो बातें संज्ञान में आई थीं, उस जांच में वह बातें ही नहीं थी। इस कारण उसे लौटाकर दोबारा सही जांच करने के निर्देश दिए हैं। कर्मचारियों के दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ यथोचित कार्रवाई जरूर की जाएगी।
- मनोज कुमार, डीएम
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