बदायूं। दिवाली की रौनक के साथ जिले के कुम्हारों के चाक फिर से पूरी रफ़्तार में घूम रहे हैं। जिले भर में करीब पांच हजार कुम्हार मिट्टी के दीये बनाने में दो महीने पहले से जुटे हैं। छोटे दीये की 80 पैसे और बड़े एक रुपये में मिल रहे हैं। मिट्टी के रंग-बिरंगे और डिजाइनर दीये खूब पसंद किए जा रहे हैं। शहर से लेकर गांवों तक दीयों की मांग इतनी बढ़ गई है कि कई कुम्हारों को रात-दिन काम करना पड़ रहा है। इस्लामनगर, बिल्सी, बिसौली, उसहैत, दातागंज, सहसवान आदि क्षेत्र के कुम्हारों का कहना है कि इस बार बिक्री पिछले साल से दोगुनी हो सकती है।
स्थानीय स्तर पर बढ़ा स्वदेशी रुझान
पिछले कुछ वर्षों से सस्ते चीनी इलेक्ट्रिक दीयों और लाइट्स के कारण कुम्हारों का व्यवसाय प्रभावित हुआ था। इस बार वोकल फॉर लोकल अभियान और स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग ने कुम्हारों को नई ऊर्जा दी है। लोग मिट्टी के दीयों को शुभ और पर्यावरण के अनुकूल मानते हुए इन्हें प्राथमिकता दे रहे हैं।
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आसानी से नहीं मिलती मिट्टी
कुम्हार विद्याराम, भागीरथ, राजाराम, शांति देवी ने बताया कि दिवाली को लेकर दीये बनाने का काम तेजी से चल रहा है। इन सभी का कहना है कि मिट्टी आसानी से न मिलने की वजह से कारोबार में समस्या होती है। ग्रामीण इलाके से मिट्टी लानी पड़ती है। शहर के पनवाड़ी मोहल्ले में कुम्हारों की बस्ती है और इस समय यहां मिट्टी के दीयों की दुकानें सज गई है। यहां लोग खरीददारी करने भी पहुंच रहे है।
दीए बनाता कुम्हार। संवाद