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इलाज के अभाव में दिव्यांग महिला ने दम तोड़ा, इस परिवार का हर सदस्य है दिव्यांग

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बिसौली (बदायूं)। केंद्र से लेकर राज्य सरकार में गरीबों के नाम पर कई योजनाओं का संचालन होने का दावा होता है। उन्हें पेंशन से लेकर मकान, स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी, बिजली समेत तमाम सुविधाएं देने की बात कही जा रही लेकिन जमीनी स्तर पर हकीकत कुछ और है। बुुधवार को इलाज के अभाव में एक दिव्यांग परिवार की मूकबधिर और नेत्रहीन बेटी ने दम तोड़ दिया। उस परिवार के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि कफन खरीद सके। गांव के लोगों ने चंदा करके कफन खरीदा और उसका अंतिम संस्कार किया।
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तहसील क्षेत्र के ग्राम नौली हरनाथपुर निवासी रामप्रसाद प्रजापति उर्फ गूंगे का पूरा परिवार दिव्यांग है। वह स्वयं मूकबधिर हैं। उनकी मां भूदेवी (65) नेत्रहीन हैं, जबकि पत्नी भी मूकबधिर है। उनके तीन बच्चे हैं। जो ठीक से बोल भी नहीं पाते हैं। रामप्रसाद के नाम मात्र छह बीघा जमीन है। घर का खर्चा मजदूरी आदि से चलता है। रामप्रसाद के कंधों पर अपने परिवार के अलावा दो बहनों की जिम्मेदारी भी है। उनकी एक बहन माया (52) और उसके तीन बच्चे रामप्रसाद के साथ रहते हैं। माया की शादी चंदौसी में हुई थी लेकिन उसके पति ने उसे निकाल दिया। तभी से वह अपने भाई के साथ रहती है, जबकि छोटी बहन सोमवती (35) बचपन से ही मूकबधिर थी। वह नेत्रहीन भी थी। परिवार की हालत ऐसी है कि सुबह खाना मिल गया तो शाम का पता नहीं होता। इस परिवार में एक कमाने वाला तो कई लोग उस पर निर्भर हैं। वहीं, घर में पक्की दीवार के नाम एक ईंट तक नहीं लगी है। सारी दीवारें आज भी मिट्टी की बनी हुईं है। सिर बचाने के लिए छप्पर पर पन्नी डाल ली है।
ऐसी हालत में रामप्रसाद अपनी मूकबधिर और नेत्रहीन बहन का इलाज नहीं करा सका। वह काफी समय से बीमार थी। जहां परिवार के लोगों को खाने के लाले पड़े थे। वहीं सोमवती अपनी पीड़ा से कराहती रही। आखिरकार इलाज के अभाव में बुधवार को उसने दम तोड़ दिया। परिवार के पास सिवाय आंसू के कुछ नहीं निकला। मोहल्ले के लोगों ने चंदा करके कफन मंगाया। उसके बाद खुद लकड़ी का इंतजाम किया। उसके बाद सोमवती का अंतिम संस्कार कर दिया।
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न राशन कार्ड मिला और न मिल रही पेंशन
रामप्रसाद को सुविधाओं के नाम पर एक राशन कार्ड तक नहीं बना है। न तो उसे मकान मिला, न शौचालय बना, पेंशन भी नहीं मिल रही है। आयुष्मान कार्ड भी नहीं है, जिससे परिवार के लोग अपना इलाज करा सकें।
अनाथ हो गया तीन साल का गोविंद
रामप्रसाद की बहन सोमवती का एक तीन वर्षीय बेटा गोविंद है। वह भी मूकबधिर है। उसे सुनाई नहीं देता। अब उसके पालन-पोषण की जिम्मेदारी रामप्रसाद पर आ गई है।
रामप्रसाद के परिवार का अंत्योदय राशन कार्ड बीते सप्ताह बनाया जा चुका है। आवास और शौचालय के लिए बीडीओ को निर्देशित किया गया है, जल्द ही इस परिवार को सभी सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा।
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- सीपी सरोज, एसडीएम बिसौली
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