मौसम की मार से अबतक पीड़ित रहे किसान को गेहूं की फसल से कुछ उम्मीद बनी थी, लेकिन खरीद एजेंसियों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। 13 दिन हो जाने के बाद भी खरीद मात्र 2,470 मीट्रिक टन ही हुई है। डीएम के आदेश पर कुछ संस्थाओं ने तो खरीद शुरू कर दी, लेकिन अधितकर संस्थाएं अभी भी हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं।
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सात में से केवल दो संस्थाओं ने की खरीद
बदायूं। जिले में गेहूं खरीद की जिम्मेदारी सात संस्थाओं को दी गई है। इनमें अभी तक तमाम संस्थाएं वारदाना तक नहीं खरीद सकीं हैं। कुछ संस्थाओं को खरीद के 30 प्रतिशत वारदाना देने को कह दिया गया है। बावजूद इसके उनका खरीद के प्रति लगाव दिखाई नहीं दे रहा है। विपणन विभाग ने अभी तक 2300 और यूपी एग्रो ने 170 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद कर ली हे लेकिन पीसीएफ, कर्मचारी कल्याण निगम, एसएफसी आदि संस्थाओं ने अभी तक गेहूं का एक दाना भी नहीं खरीदा है।
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115 में 20 केंद्र ही हो सके हैं सक्रिय
बदायूं। जिले में खरीद का लक्ष्य 1.33 लाख मीट्रिक टन रखा गया है। यही हाल रहा तो लक्ष्य पूर्ति भी मुश्किल हो जाएगी या ऐन वक्त पर संस्थाएं आढ़तियों और दलालों से गेहूं लेकर लक्ष्य पूरा करेंगी। शुरूआती दौर में कम खरीद ऐसे ही खेल करने को किया जाता है। जिले में सात संस्थाओं को 115 क्रय केंद्र निर्धारित किए गए हैं लेकिन विपणन शाखा ने अपने 14 और यूपी एग्रो ने अपने छह केंद्रों पर ही खरीद शुरू की है।
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गेहूं खरीद को वारदाना बना हुआ है बहाना
बदायूं। गेहूं खरीद में वारदाना (बोरे) बहाना बनकर रह गए हैं। जिन संस्थाओं ने गेहूं खरीद नहीं की है। उनके पास यही बहाना है कि वारदाना नहीं है। पीसीएफ ने वारदाना के लिए राशि प्रदेश मुख्यालय कार्यालय से जमा कर दी है। उसका वारदाना कोलकाता में लोड हो रहा है। इसके लिए दो-तीन दिन यहां पहुंचने में लग सकता है। विपणन विभाग ने बाकी सभी एजेंसियों पर बकाया होने के कारण उन्हें इस बार वारदाना देन पर रोक लगा दी थी। अब स्थिति बिगड़ती देख उनका कुल खरीद लक्ष्य देख 30 प्रतिशत के लिए बोरा देने का आदेश विपणन विभाग को कर दिया है।
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गेहूं खरीद के संबंध में वार्ता करने लखनऊ आया हुआ हैं। खरीद तो शुरू हुई है जल्दी ही खरीद में तेजी आएगी। वारदाना को जो मसला है, उसका समाधान भी उच्च स्तर पर कर दिया जाएगा।
- कौशलेंद्र वर्मा, जिला खाद्य विपणन अधिकारी