बदायूं। कोरोना की दूसरी लहर लगातार खतरनाक होती जा रही है। रोज मिलने वाले संक्रमितों की संख्या सौ के पार पहुंच गई है। दर्जनों संक्रमितों को होम क्वारंटीन किया गया है। गंभीर बीमार लोगों का मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। इसके बाद भी जिम्मेदार गंभीर नजर नहीं आ रहे। जिला अस्पताल में खराब पड़े ऑक्सीजन प्लांट की ओर अब तक जिम्मेदारों का ध्यान नहीं गया है।
जिला अस्पताल में वर्ष 2013-14 में लाखों रुपये की लागत से ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था। इसके साथ ही इमरजेंसी समेत अन्य वार्डों में ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए पाइप लाइन भी डाली गई। ताकि वार्डों में भर्ती मरीजों को उनके बेड पर ही आसानी से चौबीस घंटे ऑक्सीजन मिल सके। कुछ समय चलने के बाद ऑक्सीजन प्लांट ठप हो गया। इतना ही नहीं यहां से उपकरण चोरी हो गए। तांबे की पाइप लाइन तक स्मैक के लती निकाल ले गए। लाखों रुपये के उपकरण अब सिर्फ शोपीस साबित हो रहे हैं। कोरोना संक्रमण के बीच कई अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत की बात सामने आ रही है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर जिला अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों को ऑक्सीजन प्लांट की याद नहीं आई है। हालांकि, अब तक कोरोना संक्रमितों को मेडिकल कॉलेज में ही भर्ती कराया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज को कोविड अस्पताल बनाया गया है। यहां दो सौ बेड की व्यवस्था है।
इधर, जिस तरह से कोरोना की रफ्तार बढ़ रही है और प्रतिदिन मिलने वाले संक्रमितों की संख्या सौ के पार होने लगी है उसको देखकर कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में जिला अस्पताल के साथ अस्थाई अस्पतालों की जरूरत भी हो सकती है। फिलहाल जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडरों से ही काम चलाया जा रहा है। बेड पर मरीजों को ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही।
शासन ने मांगी रोज ऑक्सीजन खपत पर रिपोर्ट
सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर शासन गंभीर है। इसके बाद भी जिला अस्पताल प्रशासन यहां ऑक्सीजन प्लांट को लेकर गंभीर नहीं है। शासन ने सरकारी अस्पतालों से इस पर रिपोर्ट मांगी है। इतना ही नहीं प्रतिदिन की रिपोर्ट में शासन को बताना होगा कि अस्पताल में कितनी ऑक्सीजन की खपत हुई और उपलब्धता की क्या स्थिति है। शासन स्तर से आदेश मिलने के बाद जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम और मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. सीपी सिंह ने संबंधितों को दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। सोमवार से प्रतिदिन की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
बरेली से भरवाए जाते हैं ऑक्सीजन सिलिंडर
300 बेड का जिला अस्पताल ऑक्सीजन के छोटे सिलिंडरों के सहारे चल रहा है। यह सिलिंडर भी बरेली से भरवाए जाते हैं। ऑक्सीजन के बदले लाखों रुपये का भुगतान भी जिला अस्पताल को करना होता है। इसके बावजूद ऑक्सीजन प्लांट चालू करने पर अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे। अगर प्लांट चालू हो जाता है तो तत्काल मरीज को बेड पर ही ऑक्सीजन मिल सकेगी।
ऑक्सीजन प्लांट खराब है। इसको ठीक कराया जाएगा। फिलहाल अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त ऑक्सीजन सिलिंडर है। सिलिंडर बरेली से भरवाए जाते हैं। ऑक्सीजन की उपलब्धता पर शासन ने रिपोर्ट मांगी है। ऑक्सीजन प्लांट चालू कराने के लिए कार्रवाई की जा रही है। - डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस जिला अस्पताल