बदायूं। एक माह में चार सरकारी कर्मचारियों पर निलंबन की कार्रवाई होने के बाद भी जिला अस्पताल की व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट पा रही है। कर्मचारियों पर तो कार्रवाई हो रही है, लेकिन बिचौलिये तीमारदारों से सुविधा शुल्क वसूल रहे हैं। बिचौलियों पर कोई कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग नहीं कर पाया है।
एक फर्जी कर्मचारी ने मेडिकल के नाम पर सोमवार को छह हजार रुपये ऑनलाइन वसूल लिए। यह मामला मंगलवार को सीएमएस के संज्ञान में आया। अब सीएमएस छानबीन कर रहे हैं, पर अब तक कार्रवाई नहीं की गई है, जबकि सीसीटीवी कैमरे की रिकार्डिंग में प्रकरण कैद है। वहीं एक युवक बिना नौकरी के बाबू बना बैठा है।
पता यह भी चला है कि डॉक्टरों और कुछ बाबुओं ने अपने खर्चे पर युवकों को रखा हुआ है। यही लोग मरीजों से सुविधा शुल्क वसूलते हैं और उन लोगों को देते हैं। इसलिए बार-बार मरीज प्रताड़ित हो रहे हैं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं। मंगलवार को जहां मरीज और तीमारदार पर्चा बनवाने के लिए आठ बजे लाइन में लग गए। कर्मचारी नौ बजे के बाद काउंटर पर बैठे। एक घंटे देर से पर्चा बनना शुरू हुए तो पर्चा बनवाने वाले लोगों की लाइनें लग गईं। एक दिव्यांग को पर्चा बनवाने के लिए सीएमएस के कमरे तक जाना पड़ा। आरोप था कि कर्मचारी ने पर्चा बनाने को मना कर दिया। कर्मचारी ने कह दिया कि तीमारदार को लाइन में लगाओ।
अब तक यह मामले आ चुके हैं सामने
स्वास्थ्य विभाग के लापरवाह कर्मचारियों पर सीएमएस नजर रख रहे हैं। 29 फरवरी को मेडिकोलीगल के नाम पर छह हजार रुपये लेने के मामले में वार्ड ब्वाॅय दीक्षित कुमार और राजू को निलंबित किया गया था। दोनों कर्मचारियों को सीएमएस ने अपने कार्यालय में संबद्ध कर दिया था। वहीं 12 मार्च को वार्ड बॉय ह्रदेश कुमार को सट्टा खेलते हुए पुलिस ने पकड़ लिया था। वह जेल गया था। जमानत पर 14 मार्च को छूटा। सीएमएस ने संज्ञान लिया और कर्मचारी को निलंबित कर दिया। जेल में बिताई गई अवधि का वेतन भी काटने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद भी कर्मचारी बाज नहीं आए। सोमवार को नया मामला सामने आया जहां वार्ड ब्वाॅय शोएब अली दवा वितरण कक्ष में ही डॉक्टर बनकर मरीजों को दवाई लिखकर वितरित करने लगा। इस पर उसके भी निलंबन की कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के बाद जब मंगलवार को हालात देखे गए तो भी सुधार नजर न आया। व्यवस्था और लापरवाही देखने को मिली।
ब्लड जांच को एक मात्र खिड़की, लगती है लंबी लाइन
जिला अस्पताल में रोज पांच सौ से छह सौ लोग ब्लड की जांच कराने को पहुंचते हैं। यहां जांच के लिए पंजीकरण कराने को एक ही खिड़की है जिससे मरीजों और तीमारदारों को घंटों तक लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। इस अव्यवस्था की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
इंटर्नशिप खत्म फिर भी रात की डयूटी
जिला अस्पताल में दो युवक ऐसे हैं जो रात में इमरजेंसी डयूटी पर हर रोज देखे जा रहे हैं। दोनों की इंटर्नशिप एक साल पहले ही खत्म हो चुकी है, बावजूद इसके वह अस्पताल में डयूटी कर रहे हैं।
छह हजार रुपये ऑनलाइन वसूलने का मामला मेरे संज्ञान में आया है। गोपनीय तरीके से जांच कराई जा रही है। अगर कोई इंटर्नशिप खत्म होने के बाद भी ड्यूटी कर रहा तो बेहद शर्मनाक बात है। मामले की जांच के बाद दोषियों पर कठोर कार्रवाई कराई जाएगी। - डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल