बदायूं के सहसवान तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर बृहस्पतिवार को अधिवक्ताओं और एसडीएम के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। मामला तब बढ़ा जब अधिवक्ता तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार व्याप्त होने का आरोप लगाते हुए ज्ञापन देने पहुंचे। इस दौरान दोनों पक्षों में विवाद हो गया और पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा। अधिवक्ताओं ने तहसील प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
बार एसोसिएशन सहसवान की ओर से राजस्व परिषद अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अधिवक्ताओं ने 31 अक्तूबर, तीन, चार, 11 और 12 नवंबर को एसडीएम को भ्रष्टाचार से संबंधित ज्ञापन दिए थे, लेकिन कार्रवाई के बजाय उन्होंने संबंधित कर्मचारियों का पक्ष लिया। इसी के विरोध में अधिवक्ताओं ने 12 से 15 नवंबर तक तहसील के राजस्व न्यायालयों के बहिष्कार का निर्णय लिया।
एसडीएम पर लगाया ये आरोप
बार एसोसिएशन का आरोप है कि 13 नवंबर को जब अधिवक्ताओं ने एसडीएम से समस्या रखी तो उन्होंने दुर्व्यवहार और अपशब्द कहे, जिससे अधिवक्ताओं में आक्रोश फैल गया। बाद में उन्होंने तहसील परिसर में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों के स्थानांतरण व कार्रवाई की मांग की। इस मौके पर बार एसोसिएशन अध्यक्ष नेम सिंह यादव, महासचिव संदीप सक्सेना, जितेंद्र सिंह यादव, मुजफ्फर सईद, श्यामबाबू सक्सेना, सैयद जावेद इकबाल, अनेकपाल सिंह, रागिब अली, सोमवीर यादव, अक्षत सक्सेना, प्रीती सक्सेना समेत कई अधिवक्ता मौजूद रहे।
वहीं, इस संबंध में एसडीएम साईं आश्रित साखमुरी ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि अधिवक्ताओं से केवल संबंधित अधिकारी या कर्मचारी का नाम पूछकर वार्ता करने को कहा गया था। अभद्रता या अपशब्द कहने का आरोप गलत है। उन्होंने कहा कि तहसील में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार नहीं होने दिया जाएगा।