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मानकपुर में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव 

Sat, 17 Feb 2018 07:01 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बदायूं
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Manakpur
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मानकपुर गांव में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। मेन रोड से होकर गुजरना यहां काफी दिक्कत तलब है तो नालियों का पानी भी सड़क पर बहता है। गांव वालों का कहना है कि यहां अगर मेनरोड का जीर्णोद्धार हो जाए तो पूरे गांव की सूरत बदल सकती है।
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करीब छह हजार आबादी वाली मानकपुर ग्राम पंचायत में सर्वाधिक संख्या मुस्लिमों की है। काफी संख्या में लोग आर्थिक रूप से मजबूत हैं पर सीसी और इंटरलॉकिंग सड़कें पर्याप्त संख्या में नहीं बनी हैं। प्रधान शबाना कहती हैं कि ग्राम पंचायत को जो धन मिलता है, उसे सड़कों पर लगा दिया जाता है। आबादी के हिसाब से कभी भी धनराशि अवमुक्त नहीं की गई। ज्यादातर इलाकों में खड़ंजा है। सीमेंटेड कराने के लिए जितनी धनराशि चाहिए, वह विधायक या सांसद निधि से संभव हैं। गांव में आठ-नौ दिव्यांग हैं। इनमें महज एक युवक को ही दिव्यांग पेंशन का लाभ मिल पाया है। वृद्ध महिला-पुरुष और बेवाएं भी पेंशन को लेकर परेशान हैं। उनकी सुनवाई नहीं होती।
चार हजार से अधिक वोटर संख्या वाले इस गांव में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए बालिकाओं को शहर जाना पड़ता है। शबाना ने अपने पिछले कार्यकाल में एक इंटर कॉलेज के लिए भी आवाज बुलंद की थी। शबाना ने बताया कि हर घर को बिजली से रोशन करने के लिए पोल और ट्रांसफार्मर कम है। तीन महीने पहले बिजली अफसरों को पत्र देकर एक नया ट्रांसफार्मर और तीन दर्जन पोल लगवाने की मांग की गई थी। वह भी पूरी नहीं हो पाई। बारातघर और सचिवालय निर्माण के लिए बीडीओ से संपर्क साधा है। साथ ही पेयजल के लिए 25 हैंडपंप मांगे गए हैं। शबाना कहती हैं कि 40 फीसदी घरों में शौचालय नहीं हैं। ऐसे घरों को चिह्नित किया जा चुका है। धनराशि अवमुक्त होते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। 
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सूरते हाल 
आबादी- 6000 
वोटर- 4200 
शौचालय- 610 
पंचायतघर- 01 

सड़क
सीसी- 600 मीटर 
इंटरलॉकिंग- 300 मीटर 
खड़ंजा- 2000 मीटर 

लाभार्थी
प्रधानमंत्री आवास- 53 
वृद्धावस्था पेंशन- 10 
विधवा पेंशन- 06 
दिव्यांग पेंशन- 01 
राशन कार्ड- 850 
जॉब कार्डधरक- 800 

ग्राम पंचायत के कायाकल्प के लिए करीब 50 लाख रुपये से अधिक की जरूरत है। ग्रामनिधि में कभी इतना धन नहीं आता। सांसद और विधायक निधि या फिर जिला पंचायत से सड़कों के लिए धन मिल जाए तो बाकी का काम ग्रामनिधि से भी पूरा किया जा सकता है। जरूरत गांव के पेयजल योजना में चयन की भी है।
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- शबाना, प्रधान
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