समग्र गांव शासन की प्राथमिकता की सूची में शामिल हैं, लेकिन शासन की योजनाएं लागू करने के लिहाज से विभाग यहां फिसड्डी साबित हुए हैं। लापरवाही का आलम यह है कि जहां धन मिल गया है, वहां भी अधिकांश विभाग काम नहीं कर पाए हैं। इसके उलट जहां काम स्वीकृत भी हुए हैं, उनमें से कई को अभी तक धन नहीं मिल पाया है। इन परिस्थितियों में नए समग्र गांवों का चयन होने वाला है, जबकि पिछले गांवों में विकास कार्य लटके पड़े हैं। कुल मिलाकर समग्र गांवों में विकास की तस्वीर मुंह चिढ़ा रही है।
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इन विभागोें के हाथों में धन
- बाल विकास विभाग को 28.50 लाख रुपये प्राप्त हो चुके हैं और इस धनराशि से तेहरा, राज टिकौली, बरखेड़ा, सिद्धपुर, कैथोली में केंद्रों का निर्माण होना था, लेकिन निर्माण नहीं हुआ है।
- पंचायत विभाग को 216.34 लाख रुपये शौचालय निर्माण के लिए मिल चुके हैं, लेकिन टिटौली, अहिरबारा, नौगवां, नसीर नगर, मुगर्रा महानगर, अंबियापुर में शौचालयों के निर्माण नहीं हो सके हैं।
- डीआरडीए कोे आवासों के लिए 26 लाभार्थियों के नाम दिए गए थे। परियोजना निदेशक रामरक्षपाल सिंह यादव ने इनका सत्यापन कराया, तो पांच लाभार्थी अयोग्य पाए गए। आवास के लिए 14.70 लाख रुपये मिले। इसे प्रथम किस्त के रूप में लाभार्थियों को दे दिया गया है।
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मांग रहे पर नहीं मिली राशि
बिजली विभाग ने छह लाख रुपये, पीओ नेडा ने पथ प्रकाश को 77.15 लाख और कौशल विकास कार्यक्रम के लिए 23.63 लाख रुपये की मांग की गई है। ये सभी काम लटके हुए हैं। कौशल विकास के प्रशिक्षण को 23.63 लाख रुपये की मांग की गई है। आरईएस ने रोड बनाए नहीं हैं, वहीं गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। 770 लाख रुपये में इसे 405 लाख रुपये मिल भी चुके हैं।
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दरअसल कई विभागों को धन देर में मिला था। इसलिए काम लटक गए हैं। अभी भी कुछ विभागों की मांग पूरी नहीं हुई है। शासन की प्राथमिकता का कार्य है, जो मांग रखी गई है वह जल्दी ही पूरी की जाएगी।
- प्रदीप कुमार सोम, जिला विकास अधिकारी