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Budaun News: करोड़ों रुपये खर्च के बावजूद जिला पुरुष नसबंदी में पिछड़ा

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बदायूं। पुरुष नसबंदी को बढ़ावा देने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती और सुविधाओं की कमी के कारण जिला लगातार पिछड़ता जा रहा है। हालात यह हैं कि विभाग लक्ष्य बढ़ाने में तो आगे है, लेकिन लक्ष्य पूरा करने में बुरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।
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जिले को पिछले साल 20 पुरुष नसबंदी का लक्ष्य मिला था। इसमें से केवल आठ पुरुषों ने ही नसबंदी कराई, यानी काम महज 40 प्रतिशत ही हो सका। बावजूद इसके विभाग ने इस वर्ष लक्ष्य दोगुने से अधिक बढ़ाकर 42 फीसदी कर दिया है। सवाल यह है कि जब बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हैं तो इतना बड़ा लक्ष्य किस आधार पर तय कर दिया गया।
स्थिति और चिंताजनक इस कारण है कि जिला अस्पताल सहित किसी भी एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) में एक भी जनरल सर्जन तैनात नहीं है। ऐसे में पुरुष नसबंदी जैसी विशेषज्ञता वाली प्रक्रिया कैसे संचालित होगी। इसका स्पष्ट जवाब स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। 21 नवंबर से शुरू हुआ पुरुष नसबंदी पखवाड़ा औपचारिकता के नाम पर ही चलता दिख रहा है। जिले में पुरुष नसबंदी की स्थिति विभागीय मशीनरी की ढिलाई और संसाधनों की भारी कमी दिख रही है। ऐसे में इस साल भी लक्ष्य पूरा होना बेहद मुश्किल चल लग रहा है।
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जिले के किसी भी एफआरयू पर नहीं है जनरल सर्जन

जिले में पुरुष नसबंदी बाधित होने की सबसे बड़ी वजह विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। जिला अस्पताल के साथ-साथ उझानी, सहसवान, बिल्सी, बिसौली और दातागंज एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) पर एक भी जनरल सर्जन तैनात नहीं है। बिना विशेषज्ञता के पुरुष नसबंदी अभियान आगे बढ़ पाना संभव नहीं। यह कमी विभाग की सबसे बड़ी विफलता मानी जा रही है।


21 नवंबर से चल रहा है पुरुष नसबंदी पखवाड़ा

पुरुष नसबंदी पखवाड़ा 21 नवंबर से शुरू होकर 12 दिसंबर तक चलेगा, लेकिन अभियान की शुरुआत से ही विभाग की गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं। 24 नवंबर को सीएमओ कार्यालय से सारथी वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जो अपने आप में ही लापरवाही को दर्शा रही है। ऐसे में जमीनी स्तर पर गतिविधियां बेहद कमजोर नजर आ रही हैं। अभियान में वास्तविक भागीदारी और फील्ड वर्क अभी भी नदारद है।


पिछले साल के मुकाबले इस बार लक्ष्य बढ़ गया है। लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। जहां पर जनरल सर्जन नहीं हैं, वहां बाहर से बुलाएं जाते हैं। -कमलेश शर्मा, जिला परियोजना प्रबंधक
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