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Budaun News: दो साल में जेल में दोगुने हो गए मानसिक रोगी

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बदायूं। जेल में मानसिक रोगी बंदियों और कैदियों की संख्या बढ़ रही है। पिछले दो साल में इनकी संख्या दोगुनी हो गई है। दो साल पहले जहां पांच-छह मरीज थे, वहीं अब ये 13 हो गए हैं। इन सभी का बरेली के मानसिक रोग अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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जेल में इस समय करीब चौदह सौ बंदी और कैदी हैं। सर्दी, बुखार जैसी बीमारियां इनमें आम बात हैं। इनके इलाज के लिए जेल में दो डॉक्टर तैनात हैं। वे रोजाना इन्हें दवा देते हैं। जेल में 13 बंदी और कैदी ऐसे हैं, जो मानसिक रोग से ग्रसित हैं। इनमें ज्यादातर अवसाद के मरीज हैं। जेल में काउंसलिंग की व्यवस्था न होने पर उन्हें बरेली भेजा जाता है। कभी-कभी जेल अधिकारी भी उनकी समस्या का निदान कराते हैं। पिछले दो साल पहले ऐसे बंदी और कैदियों की संख्या पांच-छह थी लेकिन धीरे-धीरे यह बढ़कर 13 तक पहुंच गई।
सभी जेल में आकर ही अवसाद का शिकार हुए हैं, इनके अलावा एक कैदी का वाराणसी से इलाज चल रहा है। यह कैदी एक हत्या के मामले में दस साल की सजा काट रहा है। उसकी हालत अन्य मानसिक रोगियों की तरह नहीं है इसलिए उसे सभी से अलग रखा गया है।
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पिछले साल एक बंदी ने तीन बंदियों को किया था घायल
- पिछले साल जेल में एक बंदी ने जमानत न होने से परेशान होकर तीन बंदियों पर हमला बोल दिया था। उसने जेल में मंदिर का घंटा तोड़कर तीन बंदियों के सिर फोड़ दिए थे। हालांकि बाद में बंदी रक्षकों ने उसे पकड़ लिया था। काफी समझाने के बाद वह सामान्य हुआ था। डॉक्टरों के अनुसार ऐसे लक्षण अवसाद में ही होते हैं।
डॉक्टर बोले- जेल से न छूटने पर हो रहे अवसाद का शिकार
जेल के डॉ. शारिक हुसैन के मुताबिक यहां काउंसलिंग की व्यवस्था नहीं है। कई बंदी जेल से न छूटने की वजह से अवसाद के शिकार हो जाते हैं। इसके अलावा किसी की जमानत नहीं हुई या वह परिवार के बारे में ज्यादा सोचता हो तो उसमें मानसिक रोग के लक्षण दिखने लगते हैं।
बंदी अपने परिवार और समाज से अलग रहते हैं। उनके मन में तमाम विचार आते हैं। जेल आने के बाद उनकी इच्छाएं पूरी नहीं होती। इससे वह अवसाद में चले जाते हैं। यहां कोई काउंसलिंग करने नहीं आता लेकिन हम ही जाकर उन्हें समझाते हैं। उनके मन मुताबिक काम कराने की कोशिश करते हैं। - रणंजय सिंह, जेलर
ऐसे बंदी और कैदी ही मानसिक रोगी हो रहे हैं जो अपने परिवार और भविष्य के बारे में ज्यादा सोचते हैं। उन्हें जमानत नहीं मिल रही है, उनके मन में नकारात्मक विचार आते हैं और वह अवसाद के शिकार हो जाते हैं। इससे बचाने के लिए समय-समय पर उनकी काउंसलिंग कराई जाती है। - डॉ. सर्वेश कुमारी, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, जिला अस्पताल
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