रुदायन। प्रसव के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रुदायन लाई गई गर्भवती प्रसव पीड़ा से छटपटाती रही, लेकिन स्टाफ ने पांच सौ रुपये न मिलने पर प्रसव नहीं कराया। उसे जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया। यहां चिकित्सकों ने सामान्य प्रसव कराया। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
अखिल भारतीय वाल्मीकि यूनियन के जिलाध्यक्ष अधिवक्ता सुशील कुमार ने चिकित्साधीक्षक को दिए पत्र में कहा है कि उनके समाज की महिला मीनाक्षी पत्नी अनिल कुमार को मंगलवार को प्रसव पीड़ा हुई तो परिवार के लोग उन्हें सीएचसी रुदायन ले गए। वहां मौजूद नर्स ने पहले तो गर्भवती को देखने में ही आनाकानी की। बाद प्रसव के लिए पांच सौ रुपये की मांग शुरू कर दी।
इस बीच मीनाक्षी दर्द से छटपटाती रही, लेकिन स्टाफ नर्स पांच सौ रुपये देने पर ही प्रसव कराने पर अड़ी रही। परिजनों ने रुपये नहीं दिए तो उसने रेफर स्लिप थमा दी। परेशान होकर परिवार के लोग गर्भवती को जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने सामान्य प्रसव करा दिया। सुशील का आरोप है कि यह कोई पहला मामला नहीं है, आए दिन गर्भवतियों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है।
उन्होंने मामले की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है। इधर, चिकित्साधीक्षक डॉ. रोहित कुमार का कहना है कि शिकायती पत्र मिला है। मामले की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित स्टाफ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी।