धरा का खाली पेट भरने की योजना खटाई में पड़ गई है। इसके लिए 2013 में बना 87.30 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट शासन में फंस गया है। बदायूं के पांच ब्लाकों में भू-जल स्तर तेजी से गिर रहा है। इन ब्लाकों में डार्क जोन श्रेणी में शामिल किया गया है। स्थिति को संभालने के लिए पहले ही नए नलकूपों की स्थापना पर पाबंदी लगा दी गई है।
डार्क जोन ब्लाक में शामिल सहसवान, अंबियापुर, आसफपुर, बिसौली और इस्लामनगर ब्लाक में भू-जलस्तर सुधारने के लिए शासन ने 2012 में विस्तृत कार्य योजना मांगी थी। लोक निर्माण विभाग, बाढ़ खंड, पंचायती राज विभाग, वन विभाग और भूमि संरक्षण विभाग ने 87.30 करोड़ की कार्य योजना तैयार करके अप्रैल 2013 में शासन को भेज दी गई। जलस्तर में सुधार को पंचायती राज विभाग ने सोकपिट बनाने के लिए 4.68 करोड़ की कार्य योजना दी थी। इसके अलावा भूमि संरक्षण विभाग ने मेड़ बंदी के लिए 4.15 करोड़, बाढ़ खंड ने चैक डैम, वाटर रिचार्जेविल बनाने के लिए 18 करोड़, पंचायती राज विभाग ने 14.1 और वन विभाग ने 21.14 करोड़ की कार्य योजना तैयार की। अप्रैल 2013 में यह प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए शासन को भेज दिया गया। करीब दो साल बाद भी प्रोजेक्ट की फाइल शासन स्तर पर फंसी हुई है।
सरकारी भवनों में नहीं लग रहा इरीगेशन सिस्टम
जलस्तर में सुधार के लिए शासन ने पांच साल पहले योजना बनाई थी। इसके तहत नए बनने वाले सरकारी भवनों की छत पर इरीगेशन सिस्टम लगाया जाना था। इससे बारिश का जल संचय करके इसको वापस जमीन में भेजा जाना था। यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। सरकारी भवनों में सिर्फ एआरटीओ कार्यालय के नए भवन में इरीगेशन सिस्टम लगाया गया है।
कार्ययोजना शासन को भेजी गई थी। इसको अभी मंजूरी नहीं मिली है। कुछ ब्लाकों में स्थिति में सुधार भी आया है। सभी ब्लाकों को डार्क जोन से बाहर लाने के लिए अभी काम करने की जरूरत है।
-एमसी एक्सेना, सहायक अभियता लघु सिंचाई विभाग