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Budaun News: उझानी में करंट लगने से मिष्ठान विक्रेता और छात्र की मौत

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सुनील सक्सेना। फाइल फोटो
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उझानी। क्षेत्र के मिष्ठान विक्रेता और पांचवीं के छात्र की करंट लगने से मौत हो गई। दोनों की मौत से परिवार के लोगों का रो-रो कर बुरा हाल है। हालांकि दोनों ही मृतकों के परिवार वालों ने शवों का पोस्टमॉर्टम कराने से इंकार कर दिया।
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श्रीनारायणगंज निवासी मिष्ठान विक्रेता सुनील सक्सेना (48) की दुकान स्टेशन रोड पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के गेट के पास है। बुधवार सुबह करीब नौ बजे दुकान पर ही उनका पैर टिनशेड के पाइप से छू गया। पैर छूते ही करंट लगने से वह गिर पड़े। आसपास के दुकानदारों ने टिनशेड पर लगे पंखे का तार काटकर उन्हें उठाया। तब तक उनके भाई दिनेश भी मौके पर आ गए। भाई ने पड़ोसी दुकानदारों के साथ उन्हें सरकारी अस्पताल ले गए, लेकिन चिकित्साधीक्षक डॉ. राजकुमार गंगवार ने सुनील को मृत घोषित कर दिया। उनकी मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
इससे पहले कोतवाली क्षेत्र के गांव बसोमा में मंगलवार शाम करीब छह बजे गौरव सोलंकी का 11 वर्षीय बेटा अंशुमान उर्फ आशू अन्य बच्चों के साथ खेलते हुए घर के पास मंदिर पहुंच गया। मंदिर की ग्रिल छूते ही उसे करंट लग गया। इससे वह बेहोश हो गया। साथी बच्चों ने उसके परिजनों को हादसे के बारे में बताया तो वह भी दौड़ कर मंदिर तक पहुंच गए। बेहोशी की हालत में वह उसे राजकीय मेडिकल कॉलेज भी ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अंशुमान उझानी के बीआरए पब्लिक स्कूल में पांचवीं का छात्र था। मृतक के पिता ने बताया कि मंदिर की ग्रिल में डेढ़ महीना पहले भी करंट उतर आया था। तब उसे ठीक करा दिया गया था। तीन दिन पहले ही मंदिर की केबल भी बदलवा दी गई थी।
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बुझा परिवार का इकलौता चिराग
अंशुमान के पिता बसोमा निवासी गौरव राजकीय मेडिकल कॉलेज में दैनिक मजदूरी करते हैं। पत्नी शीलू गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं। इकलौती संतान होने की वजह से अंशुमान अपने पूरे कुनबे में सभी का लाडला था। बेटे की मौत के बाद बदहवास दंपती को कुनबे के लोग और रिश्तेदार भी ढांढस बंधाते नजर आए। हादसे से पहले मां शीलू ने अंशुमान को घर में खेलने के लिए कहा था, लेकिन अन्य बच्चों के आ जाने पर वह उनके साथ घर के बाहर निकल पड़ा था।


पिछले साल ही सुनील ने बदला था कारोबार
- दुकान पर करंट लगने से सुनील सक्सेना की जान जाने के बाद परिवार के लोग बदहवास हैं। उनकी पांच संतान में तीन बेटे और दो बेटियां हैं। बेटों में हर्ष और विवेक दिल्ली में जॉब करते हैं। मंगलवार रात ही दोनों को उन्होंने रोडवेज बस से भेजा था। भाई दिनेश ने बताया कि मिष्ठान की दुकान खोलने से एक साल पहले तक सुनील जूता चप्पल की दुकान चलाते थे। सुनील के दो भाई भी दिल्ली में ही जॉब करते हैं। सूचना मिलने के बाद बेटे और भाई भी अपराह्न उझानी लौट आए।

सुनील सक्सेना। फाइल फोटो

सुनील सक्सेना। फाइल फोटो

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