उझानी (बदायूं)। बहनोई के घर पर कुंवरगांव निवासी शिवशंकर के मौत के राज पर से दूसरे दिन भी पर्दा नहीं उठ पाया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से एक बात तो साफ हो गई कि मौत हैंगिंग से हुई है लेकिन ऐसा करने के लिए उसे क्यों मजबूर होना पड़ा, इसे लेकर तमाम तरह के सवाल उठने लगे हैं। बहनोई और उसके परिजनों की माने तो वह सोते समय तड़के चार बजे लापता हो गया था। फिर भी रिश्तेदारों ने उसे खोजने की कोशिश नहीं की। अब घरवालों को बहनोई के भाई की भूमिका पर शक होने लगा है।
कुंवरगांव थाना क्षेत्र के गांव औरंगाबाद खालसा निवासी शिवशंकर (22) पुत्र भगवान दास शनिवार सुबह में उझानी कोतवाली के गांव कोठीनगला के पास पेड़ पर लटका मिला था। कोठीनगला के पास ही गांव अथइया में शिवशंकर की बहन नीलम ब्याही है। पांच दिन पहले ही वह बहन के घर पर पहुंचा था। उसका शव पूर्वाह्न में ही मिल गया था लेकिन बहनोई समेत उसके कुनबे के लोगों को शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने के बाद ही पता लगा। जबकि अथइया के कई लोग पुलिस की मौजूदगी में शिवशंकर के शव को देखकर गांव लौट गए थे। यह बात मृतक के घरवालों समेत ग्रामीणों के गले नहीं उतर पा रही है। मृतक के घरवालों में हरीशंकर की मानें तो शिवशंकर की बहन और बहनोई ने तो यही बताया है कि शिवशंकर तड़के चार बजे से लापता हो गया था।
बहन से ज्यादा बहनोई के भाई को मृतक के बारे में जानकारी थी। घटना के बाद से वह अभी तक मृतक के घरवालों के सामने नहीं आया है। मृतक के घरवालों समेत रिश्तेदारों की जुबां पर अथइया की ही एक लड़की नाम भी आया है। मृतक के बहन और बहनोई भी यह अच्छी तरह जानते हैं। बताते हैं कि उसी को लेकर शिवशंकर बिना काम के ही पांच दिन तक बहनोई के घर पर रूका रहा। पिता भगवान दास तो यही कह रहा है कि उसका बेटा आत्मघाती कदम नहीं उठा सकता। इधर, प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार चाहर ने बताया कि शिवशंकर ने आत्महत्या क्यों की, यह तो अभी साफ नहीं हो पाया है लेकिन जांच में जल्द ही सबकुछ सामने आ जाएगा।