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महिला समेत दो की जान गई तो जागा सिस्टम, डॉक्टर और एसीएमओ को लेकर गांव पहुंचे एसडीएम

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उझानी (बदायूं)। दूषित पानी पीने से होने वाला पीलिया रोग नरऊ गांव वालों की जान ले रहा है। ग्रामीणों के शिकायत करने के बावजूद किसी ने ध्यान नहीं दिया। शुक्रवार को अमर उजाला में पीलिया से तीन लोगों के मरने की खबर छपी तो प्रशासन की नींद टूटी। एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य और एसीएमओ डॉ. प्रदीप कुमार डॉक्टरों और स्टॉफ के साथ शुक्रवार को नरऊ गांव पहुंचे। वहां कैंप लगाकर पीलिया, जुकाम और बुखार के 58 मरीज देखे गए। चार की हालत नाजुक होने से उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। सात मरीजों के ब्लड की स्लाइड बनाई गई है।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से चिकित्साधिकारी डॉ. प्रभाकर मिश्रा की अगुवाई में डॉक्टरों की टीम शुक्रवार पूर्वाह्न 11 बजे नरऊ गांव पहुंची। वहां कैंप लगाकर 58 मरीजों ने पंजीकरण कराया। इनमें अधिकतर मरीज पीलिया के बताए गए, लेकिन कई को जुकाम और बुखार भी था। चिकित्साधिकारी मिश्रा के मुताबिक- सात मरीजों का ब्लड सैंपल लेकर स्लाइड बनाई गई है। वहां के राघवेंद्र (65), उनकी पुत्रवधू सर्वेश देवी, खुशबू (10) पुत्री हप्पू, ओमवती (60) पत्नी दाताराम की हालत नाजुक बताई जाती है। इन मरीजों के पास प्राइवेट लैब की जांच रिपोर्ट थी, जिसमें पीलिया बीमारी पुष्टि की गई है। चारों को इलाज के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया गया है। इनके अलावा गंगाराम, खेमवती, पिंकी, रूमाला देवी, शिल्पी और केहरी आदि का मौके पर इलाज किया गया। उन्हें घर पर आराम करने की सलाह दी गई है। कैंप में मरीजों को दवाएं भी वितरित की।
एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य, एसीएमओ डॉ. प्रदीप कुमार और संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. कौशल गुप्ता ने मरीजों और उनके परिजन से बातचीत की। एसडीएम ने ग्रामीणों के साथ जाकर तालाब में भरा गंदा पानी देखा। एसीएमओ ने उन्हें बताया कि नालों का पानी तालाब में पहुंचने से हैंडपंपों तक संक्रमण पहुंच रहा है। एसडीएम और एसीएमओ ने दो-तीन घरों में हैंडपंप चलाकर पानी भी देखा। किीस हैंडपंप का पानी पीला तो किसी का मटमैला निकला। गलियारे में गंदगी देख एसडीएम ने प्रधान को बुलाकर सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने का निर्देश दिया। बता दें कि दूषित पेयजल की वजह से तीन महीना पहले रामपाल मौर्य, इसके बाद तीन दिन पहले प्रेमपाल और सोनवती की मौत हो चुकी है।
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‘नालों का पानी रोको या फिर पक्का कराओ तालाब’
उझानी। एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य नरऊ गांव के तालाब किनारे पहुंचे तो देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भीड़ लग गई। पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य हेमसिंह समेत मरीजों के परिजन ने उनके सामने तालाब से होने वाली दिक्कत भी बयां की। कहा- तालाब में उझानी के नालों के पानी ही परेशानी बढ़ा रहा है। पहले फसलें तबाह होती रहीं, अब जान पर बन आई है। ग्रामीणों ने एसडीएम के सामने सुझाव रखा कि नाले के पानी का आना बंद करा दीजिए। ऐसा नहीं हो सकता है तो तालाब को पक्का करा दें, जिससे गंदे पानी से आबादी में संक्रमण नहीं फैल पाए। एसडीएम ने ग्रामीणों को कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
पानी का सैंपल हो गया था फेल
उझानी। तालाब के गंदे पानी की वजह से हैंडपंपों से दूषित पानी निकलने को लेकर प्रधान शकुंतला देवी के बेटे संजू ने बताया कि नरऊ में दूषित पेयजल की समस्या सात-आठ साल से बनी हुई है। पिछले साल उन्होंने इसकी शिकायत ब्लॉक के अफसरों से की तो बदायूं से जल निगम की टीम ने मौके पर आकर हैंडपंपों के पानी का सैंपल लिया था। पानी का सैंपल फेल हो चुका है। यह बात उसने अफसरों को भी बता दी थी लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। विधानसभा और लोकसभा के चुनाव के दौरान भी ग्रामीणों ने प्रत्याशियों के सामने दिक्कत बताई थी। उस पर भी किसी ने गौर करने की जरूरत महसूस नहीं की।
गांव तीन तरफ से पानी से घिरा हुआ है। लेकिन यहां पर सबसे बड़ी समस्या उझानी कस्बे से आने वाले पानी की है। जो काफी गंदा है। इससे गांव में बदबू फैल रही है और बीमारी का कारण बन रही है। इसको लेकर अपनी रिपोर्ट डीएम को देते हुए यथास्थिति से अवगत कराएंगे। ताकि समस्या का समाधान हो सके। स्वास्थ्य विभाग की टीम को लगाया गया है, जो लोगों का इलाज कर रही है।
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- पारसनाथ मौर्य, एसडीएम सदर
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