उझानी (बदायूं)। ‘जल ही जीवन है’। यह स्लोगन अक्सर सुनने और देखने को मिल जाता है। मगर उझानी कस्बे से सटे गांव नरऊ वासियों की जिंदगी के लिए हैंडपंपों से निकल रहा पानी खतरनाक साबित हो रहा है। नलों से निकलने वाला दूषित पानी पीने से लोग पीलिया का रोग का शिकार हो रहे हैं। पीलिया की वजह से दो दिन में दो लोगों की मौत हो गई। 10 लोग अभी बीमार हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। एक व्यक्ति की तीन महीने पहले पीलिया रोग से मौत हो गई थी। हैंडपंपों से दूषित पानी निकलने की मुख्य वजह तालाब है, जिसमें उझानी कस्बे नालों का गंदा पानी जाता है।
उझानी कस्बे से करीब दो किमी दूर बसे नरऊ वासियों के पीलिया रोग का शिकार होने का कोई नया मामला नहीं है। बल्कि यहां के लोग वर्षों पहले से बीमार हो रहे हैं। वहां के 45 वर्षीय प्रेमपाल को पीलिया होने की जानकारी परिजन को दो महीने पहले हुई। शुरू में उनका कस्बे में इलाज कराया, लेकिन फायदा नहीं हुआ और उनकी हालत बिगड़ती चली गई। हालत गंभीर होने पर परिजन उन्हें अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज ले गए। वहां भर्ती कराने पर भी प्रेमपाल की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। परेशान होकर परिवार वाले तीन दिन पहले प्रेमपाल को बरेली के एक निजी अस्पताल ले जाकर भर्ती करा दिया। जहां मंगलवार रात उसकी मौत हो गई। उसी गांव की 50 साल की सोनवती पत्नी कल्यान सिंह को करीब दो महीने पहले पीलिया हुआ था। सोनवती का भी शुरू में स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया। हालात ज्यादा बिगड़ने पर परिजन पांच दिन पहले दिल्ली ले गए और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। वहां बुधवार रात सोनवती की मौत हो गई। इनके अलावा वहीं के गंगाराम (55), राघवेंद्र (66), खेमवती (45) पत्नी सुरेश, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य हेमसिंह (55), पिंकी (20) पुत्री भीमसेन, रुमाला देवी (50) पत्नी भगवान सिंह, ओमपाल (25), केहरी (65), शिल्पी (12) पुत्री मुन्नालाल, ओमवती (54) पत्नी हरीराम और रूमसिंह (26) पिछले बीमार हैं। इनमें से अधिकतर निजी क्लीनिकों और कुछ देशी उपचार करा रहे हैं। पीलिया का शिकार हेमसिंह ने बताया कि इलाज शुरू कराने से पहले अधिकतर ने निजी लैब पर चेकअप कराया तो रिपोर्ट में पीलिया ही सामने आई है। ग्रामीणों की मानें तो तालाब के गंदे पानी की वजह से ही हैंडपंपों के पानी में प्रदूषण बढ़ा है। हैंडपंपों से मटमैला पानी निकलता है। वहीं के रहने वाले रामपाल मौर्य करीब तीन महीना पहले पीलिया से मौत हो गई थी। उसका भी कई महीने इलाज हुआ था।
हर साल बर्बाद हो जाती है सैकड़ों बीघा खेत की फसलें
ग्रामीणों के मुताबिक नरऊ के तालाब का रकबा करीब सौ बीघा से अधिक है। उसमें उझानी कस्बे नालों का पानी का पानी जाता है। यह तालाब बारिश के दिनों में ओवरफ्लो हो जाता है। ओवरफ्लो होने पर तालाब का पानी भरने से खेतों में फसलें बर्बाद हो जाती है।
नरऊ में पीलिया के मरीज सामने आने का मामला संज्ञान में है। पिछले दिनों कुछ लोगों ने राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं में इलाज भी कराया है, लेकिन वास्तविक स्थिति के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।
- डॉ. शुयश दीक्षित, चिकित्साधिकारी।